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WhatsApp-Telegram News: अभी बिना सिम के भी चलता रहेगा व्हाट्सएप! सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ नियम को 31 दिसंबर तक टाला

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द लोकतंत्र : अगर आप अपने फोन से सिम निकालकर भी व्हाट्सएप या टेलीग्राम चलाते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ की गाइडलाइंस को लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। अब यह नियम 31 दिसंबर तक प्रभावी नहीं होगा, जिससे करोड़ों यूजर्स को बड़ी राहत मिली है।

सरकार ने पिछले साल नवंबर में सिम बाइंडिंग के निर्देश जारी किए थे। इस नियम का मतलब यह है कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स किसी भी मोबाइल डिवाइस पर तभी काम करेंगे, जब उसमें एक्टिव सिम कार्ड लगा होगा। अगर आप फोन से सिम निकाल देते हैं, तो ऐप अपने आप काम करना बंद कर देगा। इसके अलावा, वेब वर्जन (लैपटॉप या कंप्यूटर पर इस्तेमाल) करने पर हर 6 घंटे में अकाउंट अपने आप लॉग आउट हो जाता।

क्या है सिम बाइंडिंग का नया नियम?

सरकार ने क्यों टाली डेडलाइन?

यह नियम पहले 30 मार्च से लागू होना था, लेकिन तकनीकी कारणों और कंपनियों के ऐतराज के चलते दूरसंचार विभाग (DoT) ने इसे 31 दिसंबर तक के लिए टाल दिया है। एप्पल (Apple) जैसी बड़ी कंपनियों ने इस नियम पर आपत्ति जताई थी और इसके पीछे तकनीकी चुनौतियों का हवाला दिया था। अब कंपनियों के पास इन नियमों को लागू करने के लिए साल के अंत तक का समय है।

साइबर फ्रॉड रोकने की कोशिश

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया है। अक्सर देखा गया है कि साइबर अपराधी डिजिटल फ्रॉड करने के लिए उन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल करते हैं जो डिवाइस में मौजूद नहीं होते। फिलहाल, सिम हटा देने के बाद भी इंस्टेंट मैसेजिंग और कॉलिंग ऐप्स चलते रहते हैं, जिसका फायदा उठाकर अपराधी अक्सर क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉड को अंजाम देते हैं। सिम बाइंडिंग से इस तरह के सुरक्षा गैप को भरने में मदद मिलेगी।

यूजर्स को क्या होगा फायदा?

फिलहाल डेडलाइन बढ़ने से आपके व्हाट्सएप और टेलीग्राम के वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग आउट नहीं होंगे। साथ ही, जिन लोगों के फोन में सिम नहीं है या जो सिर्फ वाई-फाई के जरिए इन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, वे बिना किसी रुकावट के अपनी चैटिंग जारी रख सकेंगे।

Team The Loktantra

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लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप यह ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां स्वतंत्र विचारों की प्रधानता होगी। द लोकतंत्र के लिए 'पत्रकारिता' शब्द का मतलब बिलकुल अलग है। हम इसे 'प्रोफेशन' के तौर पर नहीं देखते बल्कि हमारे लिए यह समाज के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही से पूर्ण एक 'आंदोलन' है।

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