द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चले तनाव और सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीजफायर की घोषणा ने वैश्विक राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि अब अमेरिका और ईरान कई मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे। ट्रंप के अनुसार, ईरान एक ‘सफल सत्ता परिवर्तन (Regime Change)’ के दौर से गुजर चुका है और अब वहां यूरेनियम संवर्धन नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ मिलकर भूमिगत परमाणु सामग्री को बाहर निकालने की प्रक्रिया में सहयोग करेगा। साथ ही, पूरे क्षेत्र पर सख्त सैटेलाइट निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके। ट्रंप ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत को लेकर भी बातचीत जारी है और कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
चीन की कूटनीतिक भूमिका और मध्यस्थता की कोशिश
इस घटनाक्रम के बीच चीन ने भी अपनी सक्रिय भूमिका का संकेत दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने स्पष्ट किया कि चीन मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि चीन संघर्ष-विराम और संवाद को आगे बढ़ाने के लिए “रचनात्मक भूमिका” निभाता रहेगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ने दावा किया था कि चीन ने ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में अहम भूमिका निभाई है। चीन खुद को एक संतुलनकारी शक्ति और संभावित मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, खासकर तब जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन वार्ता को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाता है, तो वैश्विक कूटनीति में उसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।
40 दिन के संघर्ष के बाद सीजफायर, लेकिन अनिश्चित भविष्य
गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद यह सीजफायर लागू हुआ है। इस समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट के खुलने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में सुधार की उम्मीद भी जताई जा रही है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह देखना अभी बाकी है कि यह सीजफायर और संभावित समझौते कितने स्थायी साबित होते हैं। एक ओर जहां सहयोग और शांति की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात मिडिल ईस्ट की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं, जहां टकराव के बाद संवाद और सहयोग की संभावनाएं बन रही हैं।

