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छत्तीसगढ़ में ‘नक्सल-मुक्त’ दौर: विकास, पुनर्वास और बस्तर 2.0 की नई शुरुआत

The ‘Naxal-Free’ Era in Chhattisgarh: Development, Rehabilitation, and the New Beginning of Bastar 2.0

द लोकतंत्र/ रायपुर : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के लंबे दौर के समाप्त होने के बाद राज्य सरकार अब एक नए विकास मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सुरक्षा अभियानों के बाद अब प्राथमिकता ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर होगी। यह बदलाव न केवल नीति स्तर पर बल्कि जमीन पर भी बड़े परिवर्तन की ओर इशारा करता है।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह की रणनीतिक नीति को दिया। उनके अनुसार, सुरक्षा बलों के साहस और ‘डबल इंजन सरकार’ के समन्वय ने राज्य को नक्सलवाद से मुक्त करने में निर्णायक भूमिका निभाई है।

बस्तर 2.0: संघर्ष से पर्यटन और कृषि की ओर

बस्तर, जो कभी नक्सली हिंसा का प्रतीक था, अब एक नए रूप में उभरने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार की ‘बस्तर 2.0’ योजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को पर्यटन, कृषि और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के केंद्र के रूप में विकसित करना है।

सरकार ने 500 से अधिक दुर्गम गांवों तक योजनाएं पहुंचाई हैं, जिससे पहली बार वहां के लोगों को सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं। ‘नियाद नेल्लानार’ पहल के तहत मोबाइल टावर, सड़क निर्माण और स्वच्छ जल आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

इसके साथ ही इंद्रावती नदी पर देवगांव और मथना सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,000 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे कृषि को मजबूती मिलेगी। सरकार का फोकस फिलहाल खनन के बजाय कृषि और पर्यटन को बढ़ावा देने पर है, ताकि विकास टिकाऊ और स्थानीय लोगों के अनुकूल हो।

नक्सलियों का पुनर्वास: मुख्यधारा में वापसी का रास्ता

राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले करीब 3,000 पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य उन्हें हिंसा से दूर रखकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

सरकार के अनुसार, प्रत्येक आत्मसमर्पित व्यक्ति को तीन वर्षों तक प्रति माह 10,000 रुपये की सहायता दी जाएगी, साथ ही 50,000 रुपये की एकमुश्त राशि भी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्र में बसने वालों को एक हेक्टेयर कृषि भूमि और शहरी विकल्प चुनने वालों को आवासीय भूखंड दिया जाएगा।

व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने की भी योजना है, ताकि वे स्थायी आजीविका प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री का मानना है कि अधिकांश लोग परिस्थितियों के कारण नक्सलवाद में शामिल हुए थे, और अब जब विकास उनके द्वार तक पहुंच रहा है, तो वे स्वेच्छा से उस रास्ते पर लौटना नहीं चाहेंगे।

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Team The Loktantra

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