द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक चिंता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार को करीब 40 मिनट लंबी बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब क्षेत्र में संघर्ष, सीजफायर की कोशिशें और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय हालात को संवेदनशील बना दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बातचीत की जानकारी साझा की।
द्विपक्षीय संबंध और होर्मुज स्ट्रेट पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि बातचीत के दौरान भारत और अमेरिका के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने अपनी वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। इसके साथ ही पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए इसकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तेल सप्लाई, नाकेबंदी और बढ़ती कीमतों की चिंता
अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू किए जाने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि रोजाना करीब 20 लाख बैरल ईरानी तेल बाजार से बाहर हो सकता है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और कीमतों में उछाल आ सकता है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि संभावित कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद से इनमें थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका किसी भी जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरान को टोल देने की अनुमति नहीं देगा। यह बयान क्षेत्र में और तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। वहीं भारत ने अब तक अपने एलपीजी टैंकरों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित किया है और हाल के दिनों में कई जहाज बिना किसी बाधा के इस मार्ग से गुजर चुके हैं।

