द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Kiren Rijiju ने महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) को लेकर एक बार फिर Indian National Congress पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने निजी बातचीत में ‘स्वीकार’ किया कि कांग्रेस महिला विरोधी है। रिजिजू ने यह दावा संसद सत्र समाप्त होने के बाद संसद भवन में हुई मुलाकात का हवाला देते हुए किया। उनके इस बयान के बाद महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है।
न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में रिजिजू ने बताया कि संसद सत्र खत्म होने के बाद उनकी मुलाकात शशि थरूर से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला विरोधी हो सकती है, लेकिन कोई भी महिला उन्हें व्यक्तिगत रूप से महिला विरोधी नहीं कहेगी। रिजिजू के मुताबिक उन्होंने थरूर से कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर महिला विरोधी नहीं हो सकते, लेकिन उनकी पार्टी का रवैया महिलाओं के खिलाफ है। रिजिजू ने इसे कांग्रेस के रुख की ‘अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति’ बताया।
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
Kiren Rijiju ने कहा कि यदि कोई नेता यह मानता है कि उसकी पार्टी महिला विरोधी मानी जा सकती है, तो यह पार्टी की सोच को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधनों के खिलाफ विपक्ष द्वारा मतदान करना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखना चाहती है।
इससे पहले भी रिजिजू ने लोकसभा में विधेयक पारित न होने पर कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस महिलाओं को अधिकारों से वंचित रखने का जश्न मना रही है और देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी। बीजेपी लगातार विपक्ष को महिला विरोधी बताकर राजनीतिक हमला कर रही है।
क्यों अटका महिला आरक्षण विधेयक?
महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन विधेयक 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का प्रस्ताव लेकर आया था। इस विधेयक के तहत Lok Sabha की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का विस्तार किया जाना था।
हालांकि विपक्ष ने सीटों की संख्या बढ़ाने का विरोध किया। विपक्षी दलों का कहना था कि बिना सीट बढ़ाए भी महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित परिसीमन से बीजेपी को राजनीतिक फायदा होगा और दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव होगा, क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के बेहतर उपाय अपनाए हैं। अब महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी जंग और तेज हो गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद से लेकर जनता के बीच बड़ा राजनीतिक विमर्श बन सकता है।

