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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से राहत, AAP ने बीजेपी पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया

Pawan Khera gets relief from Supreme Court; AAP accuses BJP of misusing agencies.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट द्वारा कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दिए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने कहा कि यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि बीजेपी चुनाव के दौरान सरकारी एजेंसियों और कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की आड़ में एजेंसियों को “टूल” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होती है।

AAP का आरोप: एजेंसियों के जरिए विपक्ष को डराने की कोशिश

AAP प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने कहा कि पवन खेड़ा का मामला और पश्चिम बंगाल में IPAC से जुड़ा प्रकरण, दोनों ही इस बात के उदाहरण हैं कि कैसे चुनाव के दौरान विपक्षी दलों पर दबाव बनाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने IPAC से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। ढांडा के अनुसार, इसका उद्देश्य मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव अभियान को कमजोर करना था। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों को मजबूरन छुट्टी पर भेजा गया, जिससे कैंपेन पर सीधा असर पड़ा।

असम पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

ढांडा ने पवन खेड़ा के मामले में असम पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद असम पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की और विपक्षी नेताओं को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि जब चुनाव खत्म होते हैं, तब ऐसे मामलों में अदालतों से राहत मिल जाती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कार्रवाई का समय और उद्देश्य राजनीतिक था। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक बताया।

गौरतलब है कि पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियों को लेकर आरोप लगाए थे। इसके बाद उनके खिलाफ गुवाहाटी में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी राजनीति में एजेंसियों की भूमिका और उनके इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जो आने वाले समय में और तेज हो सकती है।

यह भी पढ़ें – यूपी राजनीति में तेज हुआ सियासी वार-पलटवार, अखिलेश यादव का सीएम योगी पर सीधा हमला

Team The Loktantra

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