द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, नक्सल उन्मूलन और विकास योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक के दौरान यह तय किया गया कि केंद्रीय गृह मंत्री 18 और 19 मई 2026 को बस्तर के दौरे पर रहेंगे।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा हालात में आए सुधार के बाद अमित शाह का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अब बस्तर को केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि विकास, रोजगार, शिक्षा और पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के कारण बस्तर में नक्सली गतिविधियों में कमी आई है। कई दूरदराज इलाकों तक सड़क, मोबाइल नेटवर्क और सरकारी योजनाएं पहुंची हैं। ऐसे में अमित शाह का दौरा बस्तर के भविष्य को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
जगदलपुर में होगी मध्य क्षेत्रीय परिषद की अहम बैठक
19 मई को जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस बैठक में नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने, विकास परियोजनाओं की समीक्षा करने और केंद्र व राज्यों के बीच समन्वय बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अलावा योगी आदित्यनाथ, डॉ. मोहन यादव और पुष्कर सिंह धामी भी शामिल होंगे। इसके अलावा चारों राज्यों के वरिष्ठ मंत्री, मुख्य सचिव, गृह विभाग के अधिकारी और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों की भागीदारी भी इस बैठक में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार का मुख्य फोकस नक्सल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने और प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं को तेज गति से लागू करने पर रहेगा। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल कनेक्टिविटी और रोजगार से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी।
‘Bastar 2.0’ मॉडल से विकास की नई रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ‘Bastar 2.0’ मॉडल को लेकर भी व्यापक चर्चा होगी। इस मॉडल का उद्देश्य बस्तर को नक्सलवाद की पहचान से बाहर निकालकर आधुनिक विकास, पर्यटन, कृषि, वन उत्पाद, शिक्षा और उद्योग के केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
सरकार का मानना है कि यदि युवाओं को रोजगार, शिक्षा और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी, तो वे मुख्यधारा से जुड़ेंगे और नक्सलवाद की जड़ें कमजोर होंगी। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दीर्घकालिक रणनीति तैयार कर रहे हैं।
राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बस्तर में शांति और विकास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे तभी स्थायी बदलाव संभव होगा। अमित शाह का प्रस्तावित दौरा इसी दिशा में एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में बस्तर को देश के उन क्षेत्रों में शामिल किया जाए, जहां सुरक्षा के साथ-साथ विकास और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़ें।

