द लोकतंत्र/ रायपुर : Chhattisgarh सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में चार वर्ष की सेवा पूरी कर भारतीय सशस्त्र बलों से सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की कुछ सीधी भर्तियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने ‘छत्तीसगढ़ अग्निवीर सैनिक आरक्षण नियम-2026’ को भी स्वीकृति प्रदान की।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य अग्निवीरों को सेवा समाप्ति के बाद बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और उनके अनुशासन, प्रशिक्षण तथा अनुभव का लाभ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में लेना है। इससे पुलिस, वन एवं जेल विभाग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्ष 2024 में विधानसभा के दौरान अग्निवीरों को राज्य की नौकरियों में आरक्षण देने की घोषणा की थी। अब मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
Chhattisgarh: वनरक्षक, जेल प्रहरी और पुलिस आरक्षक भर्ती में मिलेगा आरक्षण
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों में चार वर्ष की निर्धारित सेवा पूरी करने के बाद वैध सेवा प्रमाण-पत्र के साथ सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की वनरक्षक, जेल प्रहरी और पुलिस विभाग में आरक्षक की सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। राज्य सरकार का मानना है कि सेना में प्रशिक्षित युवाओं का अनुभव कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े विभागों के लिए उपयोगी साबित होगा। इससे न केवल पूर्व अग्निवीरों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, बल्कि सरकारी विभागों को भी अनुशासित और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होंगे।
सरकार के इस फैसले को अग्निवीर योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले युवाओं के पुनर्वास और रोजगार से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे भविष्य में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को राज्य स्तर पर रोजगार के विकल्प मिलने की संभावना बढ़ेगी।
Chhattisgarh के किसानों के लिए उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने को बनेगी मंत्रिमंडलीय उप समिति
मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों के हित से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित करने का फैसला किया गया है। सरकार के अनुसार, यह उप समिति प्रदेश में उर्वरकों की आपूर्ति, वितरण और प्रबंधन की नियमित समीक्षा करेगी। साथ ही आवश्यक सुझाव और अनुशंसाएं सरकार को देगी, ताकि किसानों को खाद की कमी जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
इस समिति की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री करेंगे, जबकि कृषि, सहकारिता और वित्त मंत्री इसके सदस्य होंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त समिति के संयोजक की भूमिका निभाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी समिति की बैठकों में आमंत्रित किया जा सकेगा।
राज्य सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से उर्वरकों की उपलब्धता की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और कृषि सीजन के दौरान आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा। इससे किसानों को समय पर खाद मिलने में सुविधा होगी और खेती-किसानी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कैबिनेट के इन दोनों फैसलों को राज्य सरकार की रोजगार और कृषि क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं के नए अवसर खोले गए हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया गया है। आने वाले समय में इन निर्णयों के क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।



