द लोकतंत्र / बिजनेस न्यूज़ : भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 95.58 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.78 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को रुपये की शुरुआत 95.75 रुपये प्रति डॉलर पर हुई। कारोबार के दौरान रुपये ने 95.65 का उच्च स्तर भी छुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को मिला सहारा
बाजार में रुपये की मजबूती के पीछे कई वजहें रहीं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी शामिल रही। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमत कम होने पर देश के आयात बिल पर दबाव कुछ कम हो सकता है और इससे रुपये को समर्थन मिलता है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रुपये के लिए महत्वपूर्ण हैं। विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाते या निकालते हैं तो इससे डॉलर की मांग और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से मुद्रा बाजार में कारोबार करने वाले लोग विदेशी निवेश के आंकड़ों पर भी नजर रखते हैं।
रुपये में पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजार की स्थिति, तेल की कीमतें और डॉलर की मजबूती भारतीय मुद्रा की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं।
डॉलर और शेयर बाजार की चाल पर नजर
कारोबारियों के मुताबिक, आगे रुपये की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी डॉलर की स्थिति, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजार के रुझान महत्वपूर्ण रहेंगे। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला बदलाव खास महत्व रखता है।
मंगलवार के कारोबार में रुपया 95.58 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव की तुलना में 20 पैसे की बढ़त है। हालांकि, रुपये में होने वाले छोटे बदलाव भी आयातकों, निर्यातकों और विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कारोबार पर असर डाल सकते हैं।
रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव का असर पेट्रोलियम उत्पादों, विदेश से आने वाले सामान और विदेशी मुद्रा में होने वाले भुगतान पर भी पड़ सकता है। इसलिए आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।




