द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद पहली बार केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की है।
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आम जनता पहले से महंगाई का सामना कर रही है और ऐसे समय में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाना लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भारत सरकार ने शुक्रवार (15 मई, 2026) को देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके बाद विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
चुनाव खत्म होने के बाद बढ़े दाम, विपक्ष ने उठाए सवाल
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के करीब 11 दिन बाद पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री विजय ने अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद ईंधन की कीमतें स्थिर रखी गईं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही दाम बढ़ा दिए गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतें आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती हैं, क्योंकि इसका असर सीधे आम लोगों की जेब और महंगाई पर पड़ता है। परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी वृद्धि होने की संभावना रहती है।
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने भी पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, गलती मोदी सरकार की, कीमत जनता चुकाएगी। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि तीन रुपये का झटका तो अभी आया है, बाकी वसूली किस्तों में होगी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात का हवाला देकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।
इस बीच विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले समय में ऊर्जा संकट और महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार के सामने एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को राहत देने का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा आने वाले दिनों में केंद्र और विपक्ष के बीच बड़े टकराव का कारण बन सकता है।

