द लोकतंत्र/ नोएडा : दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख कॉर्पोरेट हब नोएडा में मादक पदार्थों की सप्लाई (ड्रग्स सप्लाई) का तरीका तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। द लोकतंत्र की पड़ताल में सामने आया है कि कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले युवाओं के बीच वीड, OG और अन्य मादक पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है। देर रात पार्टियों, वीकेंड कल्चर और तनावभरी जीवनशैली के बीच इन नशीले पदार्थों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है।
इस बढ़ती मांग के साथ ड्रग्स सप्लायर्स ने पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए नया तरीका भी निकाल लिया है। कथित तौर पर लोकल डिलीवरी ऐप्स, फूड डिलीवरी और पैकेज डिलीवरी नेटवर्क का इस्तेमाल कर मादक पदार्थ सीधे फ्लैट्स और हाईराइज सोसायटियों तक पहुंचाए जा रहे हैं। सप्लाई का तरीका इतना सामान्य रखा जाता है कि किसी को आसानी से शक नहीं होता।
सामान्य पार्सल की तरह पहुंच रही डिलीवरी
पड़ताल के दौरान यह सामने आया कि ड्रग्स सप्लाई के लिए सामान्य डिलीवरी नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्सल्स को आम सामान की तरह पैक किया जाता है और कई मामलों में डिलीवरी एजेंट्स को भी इसकी जानकारी नहीं होती कि वे आखिर क्या डिलीवर कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सप्लायर फर्जी नाम, अस्थायी मोबाइल नंबर और डिजिटल पेमेंट्स के जरिए पूरा नेटवर्क संचालित करते हैं, जिससे उनकी पहचान तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
ग्राहकों से कथित ठगी और वसूली की शिकायतें भी
नाम न छापने की शर्त पर हमारे संवाददाता को एक ग्राहक ने बताया कि इस नेटवर्क में सिर्फ ड्रग्स सप्लाई ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाकर उनसे कथित ठगी और वसूली भी की जा रही है। ग्राहक के मुताबिक, सप्लायर्स पहले यह समझने की कोशिश करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति कितना भुगतान करने की स्थिति में है।
उसने दावा किया कि कुछ मामलों में कथित तौर पर सादी वर्दी में पहुंचे लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर ग्राहकों को डराया और मामूली मात्रा में वीड की डिलीवरी लेते समय पकड़ने का दावा कर मोटी रकम वसूली। कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़े एक ग्राहक के अनुसार, एक मामले में एक ग्राम वीड की डिलीवरी के दौरान उनके मित्र से 60 हजार रुपए लेकर मामला रफा-दफा करने की बात कही गई। डर और लोकलाज के चलते उसने उन कथित पुलिस वालों को पैसे भी दिए। हालांकि, द लोकतंत्र इन दावों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन ड्रग सप्लायरों से पुलिसिया मिलीभगत के ऐसे आरोप सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
युवाओं के बीच बढ़ती लत चिंता का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट सेक्टर में बढ़ते तनाव, अकेलेपन और बदलती लाइफस्टाइल के कारण कुछ युवा तेजी से नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आसान उपलब्धता ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को लोगों की सुविधा के लिए तैयार किया गया था, अब उनका कथित तौर पर अवैध नेटवर्क में इस्तेमाल हो रहा है।
यदि समय रहते इस पर निगरानी और सख्ती नहीं बढ़ाई गई, तो यह नेटवर्क आने वाले समय में और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल, द लोकतंत्र इस पूरे मामले की लगातार पड़ताल कर रहा है और इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

