द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : एक ऐसी गोली जो इंसान को 72 घंटे तक जगाए रखे, भूख-प्यास खत्म कर दे और डर की भावना मिटाकर अंदर आक्रामक आत्मविश्वास भर दे. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है. इस खतरनाक ड्रग का नाम है कैप्टागन, जिसे दुनिया भर में ‘जिहादी ड्रग’ और ‘गरीबों का कोकीन’ कहा जाता है. अब इस ड्रग ने भारत में भी दस्तक दे दी है.
हाल ही में Narcotics Control Bureau (NCB) ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत इस ड्रग की पहली बड़ी खेप पकड़कर अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, बरामद कैप्टागन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है।
क्या है कैप्टागन?
कैप्टागन का असली नाम फेनेथिल्लाइन (Fenethylline) है। इसे 1960 के दशक में जर्मनी में एक मेडिकल दवा के रूप में विकसित किया गया था। शुरुआत में इसका इस्तेमाल ADHD, डिप्रेशन और नार्कोलेप्सी जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता था। लेकिन धीरे-धीरे इसके गंभीर साइड इफेक्ट सामने आने लगे। मरीजों में हैलुसिनेशन, मानसिक असंतुलन, हार्ट अटैक और दौरे जैसी समस्याएं देखने को मिलीं। इसके बाद दुनिया के अधिकांश देशों ने इसे प्रतिबंधित कर दिया।
आज यह ड्रग मुख्य रूप से सीरिया, लेबनान और कुछ दक्षिणी यूरोपीय इलाकों की अवैध लैब्स में तैयार की जाती है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसका इस्तेमाल अक्सर चरमपंथी संगठनों और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सक्रिय लड़ाकों द्वारा किया जाता है। इसी वजह से इसे ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाता है।
दिल्ली और मुंद्रा पोर्ट से मिली बड़ी खेप
NCB की जांच के अनुसार, 11 मई 2026 को दिल्ली के नेब सराय इलाके में छापेमारी के दौरान 31.5 किलो कैप्टागन टैबलेट बरामद की गईं। इन्हें बेहद चालाकी से एक कमर्शियल चपाती मशीन के अंदर छिपाकर रखा गया था और सऊदी अरब के जेद्दाह भेजने की तैयारी थी।
पूछताछ में गिरफ्तार सीरियाई नागरिक Alabras Ahmad की निशानदेही पर गुजरात के Mundra Port से 196.2 किलो कैप्टागन पाउडर बरामद किया गया। जांच में सामने आया कि यह पाउडर सीरिया से आयातित भेड़ की ऊन की आड़ में भारत लाया गया था।
भारत में भी पकड़ी गई गुप्त लैब
जांच एजेंसियों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस नेटवर्क के तार भारत में चल रही एक गुप्त लैब से भी जुड़े मिले। जांच में सामने आया कि देहरादून में एक सीक्रेट लैब में इस ड्रग का निर्माण किया जा रहा था। सहारनपुर के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी फैक्ट्री 50 हजार रुपये प्रतिदिन किराए पर देकर इस नेटवर्क को सहयोग दिया था। महज 14 दिनों में यहां 2 लाख से ज्यादा गोलियां बनाई गई थीं।
शरीर पर बेहद खतरनाक असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, कैप्टागन शरीर और दिमाग पर बेहद खतरनाक असर डालती है। इसे लेने के बाद व्यक्ति की दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाते हैं। कई घंटों तक नींद और थकान महसूस नहीं होती और अंदर असामान्य ऊर्जा व आक्रामकता पैदा हो जाती है। लंबे समय तक सेवन करने पर यह शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह नुकसान पहुंचाती है।
अमित शाह बोले- ड्रग फ्री इंडिया के लिए प्रतिबद्ध सरकार
इस कार्रवाई के बाद केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि मोदी सरकार ‘ड्रग फ्री इंडिया’ के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत की सीमा में प्रवेश करने वाली हर अवैध ड्रग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा एजेंसियों को अब चिंता है कि भारत कहीं इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का ट्रांजिट प्वाइंट न बन जाए। NCB फिलहाल इस नेटवर्क से जुड़े एक अन्य सीरियाई नागरिक की तलाश में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ ड्रग तस्करी का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

