द लोकतंत्र/ पटना : भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाकर नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। इस घटनाक्रम ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर राज्य में नई बहस छेड़ दी है।
सोमवार को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित अति पिछड़ा सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और राज्य को अपराधमुक्त बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी भी अपराधी के सामने झुकने वाले नहीं हैं और अपराधियों को बिहार छोड़ना ही होगा। उन्होंने कहा कि चाहे कोई कितना भी अपराधियों के पक्ष में खड़ा हो जाए, सरकार अपने अभियान से पीछे नहीं हटेगी। सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि बिहार की जनता, विशेषकर अति पिछड़ा समाज, उनकी प्राथमिकता है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
अपराधियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा: Samrat Choudhary
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को अपराधमुक्त बनाने के संकल्प पर सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का शासन स्थापित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने अति पिछड़ा वर्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस समाज के हितों और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार का अपराध विरोधी अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री के इस बयान को भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी चुनावी माहौल में कानून-व्यवस्था का मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
Samrat Choudhary सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
दूसरी ओर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पुलिस को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और उसका उद्देश्य केवल बल प्रयोग नहीं होना चाहिए।
अशोक चौधरी ने कहा कि भरत भूषण तिवारी को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार वे कोई हिस्ट्रीशीटर अपराधी नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि कई प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उनकी तस्वीरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और समाज में उनकी पहचान एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी रही है।
मंत्री ने कहा कि जब घटना की जानकारी मिली तो प्रारंभिक तौर पर यह समझा गया कि कोई बड़ा अपराधी मारा गया होगा, लेकिन बाद में सामने आए तथ्यों ने कई सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में मामले की जांच और उससे जुड़े निष्कर्षों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




