द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और छात्रों के मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच पाकिस्तान की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। हालांकि पाकिस्तान ने इस पूरे मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसे भारत का आंतरिक विषय बताया है। इस बीच देश में पेपर लीक, छात्रों के विरोध और सरकार तथा CJP के बीच संवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी से एक प्रेस वार्ता के दौरान दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज को लेकर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देगा। उधर, भारत में पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार और CJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ छात्रों के हितों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की बात कर रहे हैं।
पेपर लीक पर प्रधानमंत्री की घोषणा, CJP ने उठाए जवाबदेही के सवाल
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिल सके।
प्रधानमंत्री की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि दोषियों को सजा मिलना आवश्यक है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आखिर बार-बार पेपर लीक की घटनाएं क्यों हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की कमी है और जब तक जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग पाएगी। रांका ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को इस तरह मजबूत किया जाना चाहिए कि भविष्य में पेपर लीक की कोई संभावना ही न बचे। यह CJP का पक्ष है, जिस पर सरकार की अलग राय सामने आई है।
सरकार ने बातचीत की कही बात, CJP की ओर से जवाब नहीं मिलने का दावा
केंद्र सरकार का कहना है कि वह छात्रों और प्रदर्शनकारी संगठन से बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों के दौरान सरकार की ओर से CJP के प्रतिनिधियों को चार बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी उचित स्थान पर प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करने के लिए तैयार है और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहती है। हालांकि, इस दावे पर CJP की ओर से इस खबर के प्रकाशन तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
फिलहाल, पेपर लीक विवाद और CJP के प्रदर्शन को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। एक ओर सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों पर कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर CJP और अन्य प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि केवल कार्रवाई की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करते हुए पूरी व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच संभावित वार्ता तथा इस मुद्दे पर आगे उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है।




