द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : नीट-यूजी पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिनों का अनशन समाप्त करने के बाद नगीना सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष Chandrashekhar Azad ने भी अपना धरना समाप्त करने की घोषणा की है। धरना खत्म करने के बाद जारी वीडियो संदेश में उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की और कहा कि सरकार को 15 दिनों के भीतर ठोस कदम उठाने चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है और सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि तय समय के भीतर प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो देशभर में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
Chandrashekhar Azad ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा सुधार की उठाई मांग
वीडियो संदेश में चंद्रशेखर आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संबोधन का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के मामलों में कड़ी कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कही थी। आजाद ने कहा कि यदि सरकार कानून लाना चाहती है तो उसका स्वागत है, लेकिन केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। साथ ही, उन्होंने उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की, जिन पर छात्रों और छात्राओं के खिलाफ बल प्रयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। यह मांग चंद्रशेखर आजाद का राजनीतिक पक्ष है। इस संबंध में सरकार और संबंधित एजेंसियों का अपना अलग पक्ष भी है। इसके अलावा उन्होंने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और युवाओं का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कायम रहे।
Chandrashekhar Azad ने सरकार को दिया 15 दिन का समय, शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील
चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को 15 दिन का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में छात्रों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो देशभर में जिला मुख्यालयों पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनके शांतिपूर्ण संघर्ष के कारण ही सरकार को इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देनी पड़ी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहें।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए पेपर लीक मामलों में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे।
फिलहाल, सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने और चंद्रशेखर आजाद द्वारा धरना खत्म किए जाने के बाद आंदोलन नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलन से जुड़े पक्षों के बीच संभावित वार्ता तथा लिए जाने वाले फैसलों पर सभी की नजर बनी रहेगी।



