द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : ‘Vande Mataram’ के पूरे छंद गाने को लेकर देश में जारी सियासी बहस के बीच कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के बयान ने विवाद को और तेज कर दिया है। हरिप्रसाद ने कहा कि उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए या जेल भेज दिया जाए, लेकिन वह वंदे मातरम के दो ही छंद गाएंगे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी दो छंद ही गाए जाते हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार की ओर से वंदे मातरम के पूरे छह छंदों के आधिकारिक कार्यक्रमों में गायन को लेकर नए प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। गृह मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक, आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के छह छंदों वाले आधिकारिक संस्करण का इस्तेमाल किया जाना है। इस मुद्दे को लेकर बीजेपी लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रही है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं की ओर से राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण के गायन को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि पार्टी लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार पहले दो छंदों का गायन करती रही है।
सोनिया गांधी से लेकर खरगे तक, Vande Mataram पर कांग्रेस का पलटवार
वंदे मातरम को लेकर विवाद केवल बीके हरिप्रसाद के बयान तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम को लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। बीजेपी की ओर से सोनिया गांधी को लेकर सवाल उठाए गए और उनके खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गईं।
वहीं गोवा में कांग्रेस की बैठक के दौरान दो छंद गाए जाने को लेकर भी बीजेपी ने सवाल उठाए। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद थे। खरगे ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने वही परंपरा अपनाई है, जो लंबे समय से चली आ रही है।
खरगे ने तर्क दिया कि वंदे मातरम के संबंध में कांग्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में ही एक परंपरा और निर्णय कायम किया था। उन्होंने बीजेपी पर राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि अगर दो छंद गाना गलत है तो स्वतंत्रता आंदोलन के दौर के उन नेताओं को भी कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए, जिन्होंने इसी परंपरा का पालन किया।
Vande Mataram के छह छंदों के नए प्रोटोकॉल से क्यों बढ़ा विवाद?
वंदे मातरम के पूरे संस्करण को लेकर मौजूदा विवाद की एक बड़ी वजह केंद्र सरकार की ओर से जारी नए दिशा-निर्देश हैं। गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में राष्ट्रीय गीत के गायन और प्रस्तुति को लेकर प्रोटोकॉल जारी किया था। इसके तहत आधिकारिक कार्यक्रमों में छह छंदों वाले आधिकारिक संस्करण को गाने या बजाने का प्रावधान किया गया है। जब वंदे मातरम और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएं तो पहले राष्ट्रीय गीत और उसके बाद राष्ट्रगान होगा।
इसके अलावा अगस्त 2026 में Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रगान के साथ कानूनी संरक्षण भी मिला है। कानून के तहत जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने या ऐसे कार्यक्रम में व्यवधान डालने पर तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। हालांकि, यह अलग बात है कि केवल गीत के सभी छंद नहीं गाने को लेकर कानूनी स्थिति और सरकारी प्रोटोकॉल को अलग-अलग समझना जरूरी है।
ऐसे में बीके हरिप्रसाद का ‘फांसी दे दो, दो ही छंद गाऊंगा’ वाला बयान राजनीतिक बहस को और धार दे सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।



