द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच भारत ने अपनी समुद्री निगरानी क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स (GA-ASI) के साथ दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन 30 महीने के लिए लीज पर लेने का करीब ₹1,943 करोड़ का करार किया है। यह समझौता 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में हुआ।
इन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) का इस्तेमाल भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही यानी ISR मिशनों के लिए करेगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, एडवांस सेंसर और पेलोड से लैस ये ड्रोन समुद्री क्षेत्र में लंबे समय तक निगरानी बनाए रखने में मदद करेंगे और बदलते घटनाक्रम पर भारत की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करेंगे।
भारत पहले से ही ऐसे ड्रोन का संचालन कर रहा है। भारतीय नौसेना ने 2020 में दो MQ-9B Sea Guardian लीज पर लिए थे और बाद में उनके लीज की अवधि बढ़ाई गई। नए दो ड्रोन ऐसे समय में शामिल किए जा रहे हैं, जब भारत की समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
MQ-9B Sea Guardian क्यों है खास? हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की नजर
MQ-9B Sea Guardian कोई सामान्य ड्रोन नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा High-Altitude Long-Endurance remotely piloted aircraft है। इसे जमीन पर मौजूद ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से ऑपरेट किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत लंबे समय तक लगातार निगरानी करने की क्षमता है। MQ-9 परिवार के एयरक्राफ्ट करीब 50,000 फीट तक की ऊंचाई पर ऑपरेट कर सकते हैं और 27 घंटे से ज्यादा की एंड्योरेंस क्षमता के लिए जाने जाते हैं। Sea Guardian खास तौर पर समुद्री निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। इसके जरिए भारतीय नौसेना बड़े समुद्री क्षेत्र में जहाजों, संदिग्ध गतिविधियों और अन्य समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकती है।
भारत ने अक्टूबर 2024 में अमेरिका के साथ 31 MQ-9B Sky/Sea Guardian RPAS की ट्राई-सर्विस खरीद का करार भी किया था। इसमें नौसेना के लिए Sea Guardian और थलसेना व वायुसेना के लिए Sky Guardian शामिल हैं। नए लीज समझौते का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 31 ड्रोन की खरीद के तहत मिलने वाले प्लेटफॉर्म की डिलीवरी शुरू होने तक भारतीय नौसेना को अतिरिक्त निगरानी क्षमता उपलब्ध रहेगी।
ईरान युद्ध के बीच ड्रोन पर नजर, भारत ने क्यों बढ़ाई क्षमता?
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच MQ-9 ड्रोन की भूमिका भी चर्चा में रही है। ईरान ने अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराने के दावे किए हैं, हालांकि ऐसे दावों और उनकी संख्या की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों में समान रूप से नहीं हुई है। इसलिए 40 से ज्यादा MQ-9 ड्रोन गिराए जाने के दावे को ईरान का दावा ही माना जाना चाहिए।
भारत के नए समझौते को सीधे तौर पर ईरान युद्ध की प्रतिक्रिया बताने के बजाय इसे भारतीय नौसेना की दीर्घकालिक समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत करने की व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखना अधिक उचित है। ₹1,943 करोड़ का यह 30 महीने का लीज समझौता भारत को तत्काल अतिरिक्त ISR क्षमता देता है, जबकि 31 MQ-9B की अलग खरीद के तहत भविष्य की क्षमता तैयार की जा रही है।




