द लोकतंत्र/ पुणे : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्र पहचान और अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं केवल बेटी, पत्नी या मां की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान और अस्तित्व है। राहुल गांधी ने महिलाओं को देश की ताकत बताते हुए समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल उठाए।
कार्यक्रम में पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह यहां राजनीति करने नहीं आए हैं। उन्होंने युवाओं और छात्राओं को अपनी बात रखने का मौका दिया और कहा कि वे बताएं कि वे क्या सोचते हैं और क्या चाहते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि विचारों का आपस में आदान-प्रदान होना चाहिए और इन्हीं के आधार पर समस्याओं पर चर्चा की जानी चाहिए। इस दौरान उन्होंने अपनी शर्ट पर ‘गर्ल पावर’ बैज भी लगाया हुआ था। राहुल गांधी ने कहा कि भारत की वास्तविक ताकत देश के करोड़ों लोगों के सपनों और विचारों में है। उनके मुताबिक, महिलाओं को उनकी पारिवारिक भूमिकाओं से आगे एक स्वतंत्र व्यक्ति के तौर पर देखने की जरूरत है।
‘महिलाओं की पहचान पिता, पति या बेटे से नहीं’, पितृसत्ता पर Rahul Gandhi का हमला
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को अक्सर तीन भूमिकाओं बेटी, पत्नी और मां तक सीमित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पिता, पति और बेटे के साथ महिला का रिश्ता जरूर है, लेकिन उसकी पहचान केवल इन रिश्तों से तय नहीं होनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि देश की लड़कियों का आजाद होना जरूरी है। राहुल गांधी ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए महिलाओं की स्वतंत्र पहचान के सवाल को उठाया और कहा कि महिलाओं को किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद महिलाओं से बातचीत की और उनके अनुभव सुने। एक महिला ने बताया कि परिवार और समाज अक्सर महिलाओं से नौकरी करने के साथ-साथ घर और बच्चों की जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा करता है। राहुल गांधी ने महिलाओं से जुड़े संपत्ति अधिकार, शिक्षा, रोजगार और स्वतंत्रता के मुद्दों पर भी सवाल किए।
उन्होंने कहा कि देश में आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी इच्छा से अकेले बाहर नहीं जा पातीं। पढ़ाई और रोजगार के बीच भी महिलाओं को सामाजिक और पारिवारिक दबाव का सामना करना पड़ता है। राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्र संपत्ति के कम प्रतिशत का भी उल्लेख करते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण बताया।
नेहा सिंह राठौड़ ने साझा किया अनुभव, महिलाओं के साथ अलग व्यवहार पर उठे सवाल
कार्यक्रम में भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ ने भी राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया। उन्होंने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछने पर उन्हें कई बार विरोध, ट्रोलिंग और एफआईआर जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपने पुराने गीत ‘यूपी में का बा’ के बाद कथित तौर पर पुलिस के घर पहुंचने का भी जिक्र किया।
नेहा सिंह राठौड़ ने कहा कि महिलाओं को सोशल मीडिया और सार्वजनिक जीवन में अलग तरह की ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं पर सवाल उठाते समय अक्सर उनके काम के बजाय उनके चरित्र को निशाना बनाया जाता है। राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में पुरुषों और महिलाओं के लिए समाज के अलग-अलग मानदंडों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लड़कों को देर रात तक बाहर रहने, परीक्षा देने और अपने फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिलती है, जबकि लड़कियों के लिए उम्र, शादी, घर और सुरक्षा को लेकर कई तरह की सीमाएं तय कर दी जाती हैं।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पुरुषों के व्यवहार को सामान्य माना जाता है, तो महिलाओं के उसी व्यवहार को लेकर ‘कल्चरल शॉक’ की बात क्यों की जाती है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, स्वतंत्रता और समान अधिकारों को लेकर संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।




