द लोकतंत्र: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अपनी व्यस्त कार्यशैली और राजनैतिक जीवन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके जीवन के कई अनछुए पहलू भी हैं जो अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। खुद पीएम मोदी यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे फिल्मों के बहुत अधिक शौकीन नहीं हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद की क्लासिक फिल्म ‘गाइड’ उनके दिल के बेहद करीब रही है। इस फिल्म से जुड़ा उनका एक पुराना किस्सा अक्सर उनके वैचारिक और दार्शनिक दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है।
बचपन में देखा गया सिनेमा और उसका गहरा प्रभाव
वर्ष 1965 में रिलीज हुई फिल्म ‘गाइड’ का निर्देशन विजय आनंद ने किया था। यह फिल्म प्रसिद्ध लेखक आर.के. नारायण के वर्ष 1958 में आए लोकप्रिय उपन्यास ‘द गाइड’ पर आधारित थी। फिल्म में देव आनंद ने राजू यानी एक टूरिस्ट गाइड की भूमिका निभाई थी, जबकि वहीदा रहमान ने रोजी का मुख्य किरदार निभाया था।
जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र महज 15 वर्ष थी। उस कम उम्र में इस फिल्म को देखने के बाद उन्होंने अपने दोस्तों के साथ इसके दार्शनिक पहलुओं पर चर्चा की थी। हालांकि उस समय उनके दोस्तों ने इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन फिल्म के मूल संदेश ने युवा नरेंद्र मोदी के मन पर गहरी छाप छोड़ी।
‘गाइड’ का दार्शनिक और सामाजिक संदेश
पीएम मोदी के अनुसार, ‘गाइड’ फिल्म का सबसे बड़ा संदेश यह था कि हर व्यक्ति को जीवन का सही मार्गदर्शन अपने अंतर्मन से ही प्राप्त होता है। इसके अलावा, फिल्म की कहानी केवल एक प्रेम प्रसंग तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक दृष्टिकोण, और महत्वाकांक्षा जैसे गंभीर विषयों को गहराई से उठाया गया था। फिल्म के कुछ दृश्यों, विशेषकर ग्रामीण भारत में सूखे और पानी की कमी जैसी समस्याओं ने भी उनके सामाजिक नजरिए को प्रभावित किया था।
वर्ष 2018 में जब लद्दाख के छात्रों का एक समूह प्रधानमंत्री मोदी से मिलने उनके आधिकारिक आवास पर पहुंचा था, तब एक छात्र के सवाल के जवाब में उन्होंने खुद इस बात का जिक्र किया था कि बचपन और युवावस्था में देखी गई ‘गाइड’ ने उनके जीवन पर विशेष प्रभाव डाला है।
देव आनंद के प्रति सम्मान और सिनेमा का योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर लीजेंड्री एक्टर देव आनंद के योगदान की सराहना की है। 26 सितंबर 2023 को देव आनंद की 100वीं जयंती के अवसर पर उन्हें याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि वे सिनेमा जगत के एक एवरग्रीन आइकॉन थे, जिनकी कहानी कहने की अनूठी शैली ने भारतीय समाज की आकांक्षाओं को मंच प्रदान किया।
आज के दौर में भी ‘गाइड’ के गाने जैसे ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ और ‘तेरे मेरे सपने’ दर्शकों की जुबान पर हैं। यह फिल्म और उससे जुड़ा प्रधानमंत्री मोदी का यह संस्मरण यह साबित करता है कि कला और सिनेमा का प्रभाव किसी व्यक्ति के वैचारिक विकास में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




