द लोकतंत्र/नई दिल्ली: महाराष्ट्र में Shiv Sena के नाम और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को लेकर जारी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की भूमिका पर अहम सवाल उठाए हैं। 16 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब पार्टी की पहचान तय करने वाले अलग-अलग परीक्षणों में दिक्कतें थीं, तो आयोग ने किसी एक गुट को पुराने नाम और चुनाव चिह्न का लाभ देने के बजाय निष्पक्ष विकल्प क्यों नहीं अपनाया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल किया कि क्या दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने का विकल्प दिया जा सकता था, ताकि किसी एक पक्ष को पुरानी पार्टी के नाम और चिह्न का फायदा न मिले।
शिंदे गुट को कैसे मिला ‘धनुष-बाण’?
शिवसेना में 2022 में विभाजन के बाद एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद शुरू हुआ। चुनाव आयोग ने अक्टूबर 2022 में ‘धनुष-बाण’ को अंतरिम रूप से फ्रीज कर दिया था। इसके बाद 17 फरवरी 2023 को आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को ‘Shiv Sena’ नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न देने का फैसला किया।
आयोग ने संगठनात्मक और विधायी समर्थन समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की थी, लेकिन संगठनात्मक आंकड़ों को पर्याप्त विश्वसनीय आधार मानने में कठिनाई बताई थी। इसके बाद विधायी बहुमत शिंदे गुट के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बना।
विधायी बहुमत पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब संबंधित विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले लंबित हों, तब विधायकों की संख्या को पार्टी की पहचान तय करने का आधार बनाना कितना उचित है। शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने दलील दी कि अन्य परीक्षणों में व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण विधायी बहुमत इस मामले में व्यवहारिक आधार था।
पैरा 15 क्यों महत्वपूर्ण?
विवाद का केंद्र Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 का पैरा 15 है। इसी प्रावधान के तहत चुनाव आयोग मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के नाम और चुनाव चिह्न पर प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों का फैसला करता है। अब सुप्रीम कोर्ट यह देख रहा है कि आयोग ने पैरा 15 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए सभी प्रासंगिक परीक्षणों और वैकल्पिक रास्तों पर पर्याप्त विचार किया था या नहीं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है। मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी और उसके बाद ही शिवसेना के नाम और ‘धनुष-बाण’ को लेकर अंतिम न्यायिक स्थिति स्पष्ट होगी।




