द लोकतंत्र/लखनऊ: UP Election 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को जिला स्तर तक ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी पूरे प्रदेश के लिए एक घोषणापत्र के साथ-साथ हर जिले के लिए अलग घोषणापत्र तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। यानी सपा का फॉर्मूला होगा—‘75 जिले, 75 घोषणापत्र’। पार्टी का कहना है कि इससे स्थानीय समस्याओं और क्षेत्र की जरूरतों को सीधे चुनावी एजेंडे में शामिल किया जा सकेगा। इस रणनीति के साथ सपा का फोकस गैर-यादव ओबीसी और दलितों, खासकर गैर-जाटव दलित समुदायों तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर भी है। पार्टी की PDA रणनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ने की कोशिश पहले से ही प्रमुख मुद्दा रही है।
75 जिलों के लिए अलग-अलग मुद्दे, अलग एजेंडा
सपा के जिला संगठनों को अपने-अपने क्षेत्रों की कम से कम पांच प्रमुख समस्याओं की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा बंद पड़ी परियोजनाओं, स्थानीय रोजगार की संभावनाओं और विकास से जुड़े मुद्दों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। UP Election 2027 के लिए पार्टी की तैयारी में शिक्षा-स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग, किसान एवं कारीगर, बुनियादी ढांचा और पर्यटन जैसे विषयों को शामिल किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि हर जिले की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के मुताबिक स्थानीय मुद्दों को घोषणापत्र में जगह मिले। यानी नोएडा जैसे औद्योगिक और शहरी जिले की प्राथमिकताएं बुंदेलखंड के किसी जिले से अलग हो सकती हैं। इसी अंतर को ध्यान में रखकर सपा स्थानीय स्तर पर अलग-अलग रोडमैप तैयार करने की कोशिश कर रही है।
गांव-गांव PDA पंचायत, जातीय समीकरण साधने की कोशिश
UP Election 2027 की घोषणापत्र के साथ सपा की जमीनी रणनीति भी तेज होती दिखाई दे रही है। पार्टी की जिला इकाइयों की ओर से गांवों में PDA पंचायतों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में पार्टी के अलग-अलग सामाजिक समूहों से आने वाले नेताओं और जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जा रहा है। इन पंचायतों के जरिए स्थानीय समस्याओं, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दों पर संवाद करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी के नेताओं के मुताबिक, इन कार्यक्रमों में विभिन्न समुदायों के लोगों की भागीदारी हो रही है।
गैर-यादव OBC पर नजर, कई जातियों तक पहुंच का दावा
एटा के सपा सांसद देवेश शाक्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी कुर्मी, मौर्य, सैनी, निषाद, प्रजापति और पाल-गड़रिया समेत विभिन्न जातियों के मतदाताओं से जुड़ने का प्रयास कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, शाक्य को अलीगढ़, हाथरस, मैनपुरी, कानपुर नगर और कानपुर देहात की विधानसभा सीटों में PDA पंचायतों के जरिए पार्टी की जमीनी गतिविधियों में भाग लेने और मतदाताओं के रुझान को समझने की जिम्मेदारी दी गई है।
दलित वोट बैंक में भी विस्तार की कोशिश
सपा की रणनीति में दूसरा बड़ा फोकस दलित मतदाता हैं। पार्टी खास तौर पर गैर-जाटव दलित समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट में भी सपा की ‘PDA 2.0’ रणनीति के तहत सामान्य सीटों पर दलित प्रतिनिधित्व बढ़ाने की संभावित योजना का उल्लेख किया गया था। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले सपा की कोशिश अपने पारंपरिक आधार के साथ उन सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की है, जिनका समर्थन उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में अहम माना जाता है।
बूथ कमेटियों का भी विस्तार
पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव किए हैं। सपा सूत्रों के मुताबिक, बूथ समितियों में अब पहले की तुलना में ज्यादा सदस्यों को शामिल करने की व्यवस्था की गई है। पार्टी का दावा है कि बूथ स्तर पर समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद चुनावी रणनीति को सिर्फ बड़े नेताओं और रैलियों तक सीमित रखने के बजाय बूथ और गांव के स्तर तक संगठन को सक्रिय करना है।
स्थानीय मुद्दों पर कितना असर डालेगी ‘75 जिले-75 घोषणापत्र’ रणनीति?
सपा की यह रणनीति UP Election 2027 में स्थानीय मुद्दों को ज्यादा प्रमुखता देने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। पार्टी का तर्क है कि विधानसभा चुनाव में सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों का सीधा असर मतदाताओं पर पड़ता है। अब देखना यह होगा कि सपा के जिला-स्तरीय घोषणापत्र किस तरह तैयार होते हैं और क्या ये स्थानीय मुद्दे पार्टी की व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा बन पाते हैं। फिलहाल ‘75 जिले, 75 घोषणापत्र’ और PDA पंचायतों के जरिए सपा ने 2027 की तैयारी को जिला और बूथ स्तर तक ले जाने का संकेत दिया है।
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