द लोकतंत्र / नई दिल्ली : दिल्ली में Ganesh Visarjan 2026 को लेकर तैयारियां तेज हैं। गणेश चतुर्थी के बाद मूर्ति विसर्जन को देखते हुए दिल्ली सरकार ने राजधानी में 81 कृत्रिम तालाब तैयार किए हैं। इन तालाबों का इस्तेमाल गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को विसर्जन के लिए सुरक्षित और तय स्थान उपलब्ध कराना और यमुना समेत प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना है। दिल्ली में यमुना और दूसरे प्राकृतिक जलाशयों में सीधे मूर्ति विसर्जन की अनुमति नहीं है।
यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने यमुना और अन्य जलस्रोतों में सीधे मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई है। विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से तय स्थानों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। DPCC के निर्देशों के अनुसार मूर्ति बनाने और सजाने में प्राकृतिक मिट्टी, आसानी से नष्ट होने वाली सामग्री और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों को जलस्रोतों में विसर्जित करने की अनुमति नहीं है।
इसके अलावा, सरकार ने पुरानी और क्षतिग्रस्त मूर्तियों तथा धार्मिक सामग्री को सम्मानजनक तरीके से हटाने के लिए 110 संग्रह केंद्र भी बनाए हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य ऐसी सामग्री को यमुना या अन्य जलस्रोतों में फेंके जाने से रोकना है। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य धार्मिक परंपरा के साथ पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा और सफाई की व्यवस्था
गणेश विसर्जन के लिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बनाए गए कृत्रिम तालाब श्रद्धालुओं को निर्धारित स्थान पर प्रतिमा विसर्जित करने का विकल्प देंगे। प्रशासन की ओर से विसर्जन स्थलों पर साफ-सफाई, सुरक्षा, रोशनी और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। विसर्जन के बाद मूर्तियों के बचे हिस्सों और पूजा सामग्री को हटाकर जगह की सफाई भी की जाएगी।
DPCC के निर्देशों में जल की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने को कहा गया है। मूर्ति विसर्जन के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित न हो, इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी बताया गया है। अधिकारियों को इन नियमों को लागू कराने और उल्लंघन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह भी पढ़े – Global ESG Conference 2026: Bharat Mandapam में जुटेंगे ESG विशेषज्ञ और नीति निर्माता




