द लोकतंत्र/नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था का मामला बताने के बाद सियासी विवाद बढ़ गया है। केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए CJI से इस्तीफा देने तक की मांग कर दी। पार्टी ने कहा कि अगर कानून-व्यवस्था संभालना उनका काम नहीं है, तो उनकी जगह किसी और को नियुक्त कर दिया जाए। इस पोस्ट पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अब न्यायपालिका को निशाना बना रही है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर CJI से मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं मिली।
केरल कांग्रेस ने CJI सूर्यकांत से क्यों मांगा इस्तीफा?
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों और राजधानी में लगाई गई पाबंदियों पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा था कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केरल कांग्रेस ने समाचार एजेंसी PTI की एक पोस्ट को दोबारा साझा किया। पार्टी ने लिखा, “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून और व्यवस्था संभालना आपका काम नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह कोई ऐसा व्यक्ति ढूंढ लेंगे, जो इसे संभाल सके।” केरल कांग्रेस की इस टिप्पणी ने न्यायपालिका की भूमिका और उसकी संवैधानिक सीमाओं को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले- न्यायपालिका अगला निशाना
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल कांग्रेस की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस का अगला निशाना न्यायपालिका है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि वह पहले भी इस बारे में आगाह कर चुके हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत की सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना चाहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत-विरोधी समूह एकजुट हो रहे हैं, जबकि देशभक्त भारतीय भी एकजुट होकर उनका सामना करेंगे। इस तरह CJI के बयान पर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा था?
CJI सूर्यकांत ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस के कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत की थी। इस दौरान उनसे दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और इसके चलते लगाई गई पाबंदियों के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा, “ये लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा है। ये मेरा विषय नहीं है।” दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, सप्ताहांत में राजधानी के 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
राहुल गांधी और खरगे को CJI ने मिलने से क्यों किया इनकार?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CJI सूर्यकांत को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। वे चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। कांग्रेस नेताओं की मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक और मतपत्रों के जरिए मतदान कराने की मांग शामिल थी। हालांकि, CJI ने मुलाकात से इनकार कर दिया। अपने जवाब में उन्होंने कहा कि पत्र में उठाए गए मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
ऐसे मामलों पर प्रशासनिक स्तर पर बैठक करना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत और न्यायिक मर्यादा के अनुरूप नहीं होगा। CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी नागरिकों के लिए खुले हैं। कोई भी नागरिक या निर्वाचित प्रतिनिधि कानून के मुताबिक अपनी शिकायत लेकर अदालत आ सकता है। उन्होंने संबंधित मुद्दों पर औपचारिक याचिका दायर करने का रास्ता भी बताया।
वोट चोरी और SIR को लेकर जारी है सियासी टकराव
मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग मतदाता सूची के संशोधन को मृत, स्थानांतरित और अन्य कारणों से अपात्र या दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं के रिकॉर्ड दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताता रहा है। इसी मुद्दे पर विपक्ष ने दिल्ली में प्रदर्शन किए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई। अब CJI के बयान और केरल कांग्रेस की प्रतिक्रिया ने इस विवाद में न्यायपालिका को लेकर एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है।
हालांकि, CJI का बयान दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के संदर्भ में था। इसे न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारियों से इनकार के रूप में देखना उनके अन्य बयानों और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के उनके सुझाव को नजरअंदाज करना होगा। फिलहाल, केरल कांग्रेस की टिप्पणी और किरेन रिजिजू के पलटवार के बाद यह विवाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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