द लोकतंत्र/अन्तर्राष्ट्रीय न्यूज़: Trump Strait नाम से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का एक नया नक्शा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर शेयर किया है। यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सात दिनों में फिर से खोलने और अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और तेहरान पर अपने रुख में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं।
ट्रंप ने नक्शे में लिखा ‘Trump Strait’
ट्रंप की ओर से साझा किए गए नक्शे में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को ‘Trump Strait’ के नाम से दिखाया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हॉर्मुज का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक नाम बदल गया है। यह नाम ट्रंप द्वारा साझा किए गए नक्शे में इस्तेमाल किया गया है।
इससे पहले सितंबर की शुरुआत में भी ट्रंप ने हॉर्मुज का नाम बदलने का सुझाव दिया था। उस समय व्हाइट हाउस ने भी एक ऐसा नक्शा साझा किया था, जिसमें जलमार्ग को ‘Trump Strait’ लिखा गया था। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसका काफी महत्व है।
ईरान ने दिया था 7 दिन में रास्ता खोलने का प्रस्ताव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका को सात दिन की योजना की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, यदि अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार करता है तो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही सात दिनों के भीतर बहाल की जा सकती है।
इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, ईरानी तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में राहत देने और लेबनान समेत क्षेत्र में संघर्ष विराम का पालन करने की शर्त रखी गई थी। योजना में इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर शुरू करने की बात भी शामिल थी।
परमाणु कार्यक्रम और हॉर्मुज को लेकर तनाव जारी
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपना सख्त रुख बरकरार रखा है। उन्होंने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और तेहरान के अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने को लेकर भी उन्होंने संदेह जताया है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अमेरिका-ईरान तनाव के बीच प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। युद्ध से पहले दुनिया के कारोबार होने वाले तेल और गैस का करीब पांचवां हिस्सा इस जलमार्ग से होकर गुजरता था। इसके चलते यहां किसी भी लंबे समय के व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
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