द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका और Iran के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच भारत में इजरायल के राजदूत रुविन अजार ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि इजरायल इस समझौते का हिस्सा नहीं है और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
एक विशेष बातचीत में रुविन अजार ने कहा कि इजरायल की प्राथमिक चिंता क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता या परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल एक संप्रभु राष्ट्र है और अपनी सुरक्षा नीति किसी बाहरी दबाव के आधार पर नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तय करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं।
Iran-US समझौते को लेकर इजरायल की चिंताएं बरकरार
रुविन अजार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के कुछ पहलुओं को लेकर इजरायल की चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। उनके अनुसार, समझौते में उन सभी मुद्दों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है जिन्हें इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने विशेष रूप से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और क्षेत्र में सक्रिय उसके सहयोगी संगठनों का उल्लेख किया। राजदूत का कहना था कि केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य आयामों पर भी गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी भी संगठन या समूह की ओर से इजरायल की सुरक्षा को चुनौती दी जाती है, तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि इज़रायल क्षेत्र में स्थिरता और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करता है।
मिडिल ईस्ट की स्थिति और अमेरिका के साथ सहयोग पर जोर
इजरायली राजदूत ने दावा किया कि हाल के वर्षों में क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत किया है और विभिन्न खतरों से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। रुविन अजार के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल के बीच सुरक्षा सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और ऐसे किसी भी खतरे को रोकना है जो शांति और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा अस्थायी युद्धविराम और कूटनीतिक प्रयासों का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इजरायल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा।
मध्य पूर्व में जारी बदलते घटनाक्रमों के बीच इजरायल की यह प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी क्षेत्रीय समीकरण पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं और आने वाले महीनों में कई नए राजनीतिक और कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।




