द लोकतंत्र/ पटना : Bihar Cabinet Expansion 2026 बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब विभागों का बंटवारा भी पूरा कर दिया गया है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच विभागों का संतुलित वितरण देखने को मिला है। नई कैबिनेट में बीजेपी कोटे से 15, जेडीयू कोटे से 13, जबकि सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कुल 32 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद विभागों का आवंटन किया गया, जिसमें सत्ता गठबंधन के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश साफ दिखाई दी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह, सामान्य प्रशासन, निगरानी, निर्वाचन और कैबिनेट सचिवालय जैसे अहम विभाग अपने पास रखे हैं। वहीं वित्त विभाग जेडीयू को दिया गया है, जबकि शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय बीजेपी के हिस्से में गए हैं।
BJP और JDU के बीच बड़े विभागों का संतुलन
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग की जिम्मेदारी मिली है, जबकि दिलीप जायसवाल को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सौंपा गया है। नितीश मिश्रा को नगर विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग मिला है, जबकि श्रेयसी सिंह को उद्योग और खेल विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा विभाग मिथलेश तिवारी को सौंपा गया है।
दूसरी ओर जनता दल यूनाइटेड के कोटे से डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग दिया गया है। वहीं बिजेंद्र प्रसाद यादव को वित्त और वाणिज्य कर विभाग की जिम्मेदारी मिली है। सबसे चर्चित नामों में निशांत कुमार शामिल रहे, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग सौंपा गया है। इसके अलावा भवन निर्माण, ऊर्जा, समाज कल्याण और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी जेडीयू नेताओं को दिए गए हैं।
सहयोगी दलों को भी मिला प्रतिनिधित्व
एनडीए सरकार में सहयोगी दलों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से संजय कुमार सिंह को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग मिला है, जबकि दूसरे मंत्री को गन्ना उद्योग विभाग दिया गया है। संतोष कुमार सुमन को फिर से लघु जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं दीपक प्रकाश को पंचायती राज विभाग दिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों के इस बंटवारे में बीजेपी और जेडीयू के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा गया है। नई सरकार के सामने अब विकास, रोजगार और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों पर तेजी से काम करने की चुनौती होगी।

