द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच बड़ी कूटनीतिक हलचल दिख रही है। दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के संभावित समझौते पर टिक गई है। Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। हालांकि, समझौते के कुछ अहम पहलुओं पर अभी चर्चा जारी है। इसके बावजूद वैश्विक बाजारों में राहत की उम्मीद बढ़ गई है।
Iran America Deal पर Donald Trump का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि समझौते के अंतिम बिंदुओं पर बातचीत चल रही है। इसके अलावा उन्होंने जल्द घोषणा का संकेत भी दिया। दरअसल, फरवरी 2026 से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा था। इसी बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट को और गंभीर बना दिया।
Strait of Hormuz खुलने से मिल सकती है राहत – Donald Trump
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। यहीं से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। हालांकि, नाकेबंदी के कारण तेल कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की मध्यस्थता में समझौते का मसौदा तैयार हुआ है। अगर समझौता लागू होता है, तो होर्मुज मार्ग फिर से खोला जा सकता है। इसके अलावा वैश्विक तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद भी बढ़ जाएगी।
Marco Rubio ने भी दिए समझौते के संकेत
Marco Rubio ने भी समझौते को लेकर बड़ा संकेत दिया है। भारत दौरे पर आए रुबियो ने कहा कि जल्द और बड़ी खबर सामने आ सकती है। वहीं अमेरिकी प्रशासन इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम मान रहा है। इसके अलावा ऊर्जा बाजारों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में प्रस्ताव को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सामने रखा जाएगा। अगर परिषद मंजूरी देती है, तो फाइल सर्वोच्च नेता के पास भेजी जाएगी। Mojtaba Khamenei की अंतिम सहमति के बाद समझौता लागू हो सकता है। हालांकि, ईरानी एजेंसी तस्नीम ने कुछ मतभेद बने रहने की बात कही है। एजेंसी के मुताबिक, कुछ नियमों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बाकी है।
Global Oil Crisis पर दुनिया की नजर
मिडिल ईस्ट तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। तेल कीमतों में उछाल से कई देशों में महंगाई बढ़ी है। वहीं ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा है। भारत समेत कई देशों ने वैकल्पिक तेल सप्लाई की कोशिशें तेज की हैं। हालांकि, होर्मुज खुलने की स्थिति में वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है।
अगर यह समझौता सफल होता है, तो मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है। इसके अलावा समुद्री व्यापार और ऊर्जा सप्लाई भी सामान्य हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। फिलहाल पूरी दुनिया अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर नजर बनाए हुए है।

