द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत ने मानवीय आधार पर ईरान के नौसैनिक जहाज IRIS Lavan को कोच्चि बंदरगाह पर तकनीकी सहायता के लिए डॉकिंग की अनुमति दी। ईरान ने भारत सरकार और भारतीय नौसेना के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच सहयोग का एक अहम उदाहरण सामने आया है। ईरान ने भारत सरकार का आभार जताया है कि उसने ईरानी नौसैनिक जहाज IRIS Lavan को तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता के लिए कोच्चि बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से ठहरने की अनुमति दी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में हाल ही में ईरान के एक अन्य नौसैनिक जहाज IRIS Dena के डूबने की घटना सामने आई थी।
भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने कहा कि ईरान इस घटना के बाद अपने नौसैनिक कर्मियों की स्थिति और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है। उन्होंने बताया कि इसी संदर्भ में ईरानी नौसेना का एक अन्य जहाज IRIS Lavan तकनीकी व्यवस्था के लिए Kochi Port पहुंचा है। राजदूत ने भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस कठिन परिस्थिति में भारत का सहयोग मानवीय दृष्टिकोण और दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।
हिंद महासागर में बढ़े तनाव के बीच मानवीय सहयोग
ईरानी राजदूत के अनुसार हिंद महासागर में ईरानी जहाज IRIS Dena से जुड़ी दुखद घटना के बाद ईरान अपने नाविकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। रिपोर्टों के मुताबिक यह जहाज श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले में डूब गया था। इस घटना के बाद खोज और बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें श्रीलंका की नौसेना ने कई नाविकों को बचाया। वहीं भारतीय नौसेना ने भी राहत अभियान में सहयोग किया और समुद्री निगरानी विमान तथा जहाजों को सहायता के लिए तैनात किया।
भारत-ईरान संबंधों का दिखा उदाहरण
भारत ने 1 मार्च को ईरान के अनुरोध पर IRIS Lavan को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति दी थी, जिसके बाद 4 मार्च को यह जहाज केरल के बंदरगाह पर पहुंचा। इस जहाज पर मौजूद लगभग 183 नौसैनिक फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं। भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar ने इस फैसले को पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि जहाज और उसके चालक दल उस समय तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच फंस गए थे।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार यह सहयोग भारत और ईरान के लंबे और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। भारत एक ओर ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंध बनाए रख रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक रणनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन भी साध रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भी भारत मानवीय सहायता और कूटनीतिक संतुलन दोनों को प्राथमिकता देता है।

