द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की तबीयत एक बार फिर अचानक बिगड़ गई है। शनिवार, 10 जनवरी को उन्हें दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही है। 74 वर्षीय धनखड़ को वॉशरूम में दो बार बेहोशी आने के बाद तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने एहतियातन उन्हें भर्ती कर विस्तृत जांच कराने की सलाह दी है, जिसमें एमआरआई भी शामिल है।
यह घटना केवल एक स्वास्थ्य अपडेट नहीं है, बल्कि उन तमाम सवालों को फिर से सामने ले आई है, जो बीते महीनों से पूर्व उपराष्ट्रपति के स्वास्थ्य, उनके अचानक इस्तीफे और उसके बाद की परिस्थितियों को लेकर उठते रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उम्र और पूर्व मेडिकल हिस्ट्री को देखते हुए डॉक्टर किसी भी जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहते। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और आगे की मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही उनकी स्थिति पर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
पहले भी कई बार बेहोशी की घटनाएं, सार्वजनिक कार्यक्रमों में बिगड़ी तबीयत
यह पहला मौका नहीं है जब जगदीप धनखड़ को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले कच्छ का रण, उत्तराखंड, केरल और दिल्ली में आयोजित विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भी उन्हें बेहोशी आने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। तब वह देश के उपराष्ट्रपति पद पर कार्यरत थे और कई बार मंच पर या कार्यक्रमों के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें सुर्खियों में रही थीं।
इन लगातार स्वास्थ्य समस्याओं के बीच ही 21 जुलाई 2025 को उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उस समय उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य को बताया था, लेकिन उनका यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा और अटकलों का विषय बन गया।
मानसून सत्र के पहले दिन इस्तीफा, कई सवाल छोड़ गया फैसला
21 जुलाई 2025 को संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था। उसी दिन दिन में बतौर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही संचालित की थी। लेकिन उसी रात उपराष्ट्रपति के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर उनका इस्तीफा सार्वजनिक हुआ। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने विपक्ष और कई राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया। कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य थी या इसके पीछे कोई और कारण भी छिपा हुआ था।
सरकारी आवास और सुविधाओं को लेकर भी चर्चा में रहे
इस्तीफे के बाद भी जगदीप धनखड़ लगातार सुर्खियों में रहे। हाल ही में यह जानकारी सामने आई थी कि इस्तीफे के पांच महीने बाद तक उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति को मिलने वाला सरकारी आवास आवंटित नहीं किया गया था। इस संबंध में उन्होंने 22 अगस्त को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर अपने अधिकारों के तहत आधिकारिक आवास की मांग की थी।
नियमों के अनुसार, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति को केंद्र सरकार की ओर से कई सुविधाएं मिलती हैं। इनमें लगभग दो लाख रुपये प्रतिमाह की पेंशन, टाइप-8 सरकारी बंगला, एक निजी सचिव, अतिरिक्त निजी सचिव, निजी सहायक, डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी और अन्य स्टाफ शामिल होता है। इन सुविधाओं को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा।

