द लोकतंत्र : उत्तराखंड के पर्यटन नगरी नैनीताल जिले के चाइना बाबा इलाके में मंगलवार शाम एक होटल में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आग की लपटें इतनी तेज थीं कि होटल में रखा लाखों का सामान जलकर खाक हो गया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टाल गया और कोई जनहानि नहीं हुई। घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में लकड़ी की संरचनाओं में सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसडीएम द्वारा घटनाक्रम का ब्यौरा
नैनीताल के एसडीएम नवाजिश खालिक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शाम 7:24 बजे उन्हें आग लगने की सूचना मिली थी।
- तत्काल कार्रवाई: सूचना मिलते ही आपदा कंट्रोल रूम को सक्रिय करते हुए फायर-फाइटिंग ऑपरेशन शुरू किया गया। एसडीएम के अनुसार, सभी टीमों के सामूहिक प्रयास से एक घंटे 10 मिनट में आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया।
- बचाव कार्य: शुरुआत में होटल में कई लोगों के फंसे होने की आशंका थी, लेकिन फायर ब्रिगेड ने दो फंसे हुए व्यक्तियों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया। किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
आग के तेजी से फैलने का कारण
नैनीताल के चीफ फायर ऑफिसर गौरव किरार ने आग के कारण और नियंत्रण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
- लकड़ी की संरचना: चीफ फायर ऑफिसर ने बताया कि शाम 7:17 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। होटल की पूरी इमारत लकड़ी की बनी होने के कारण आग तेजी से फैली और अधिक नुकसान हुआ।
- अग्निशमन प्रयास: तीन फायर टेंडर मौके पर पहुंचे और लगभग 40 मिनट में आग बुझाने में सफलता मिली। समय पर नियंत्रण पाने के कारण आग आस-पास की अन्य इमारतों में नहीं फैल पाई।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना का संज्ञान लिया और स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से निर्देश दिया है कि रात में भी घटना स्थल पर फायर टेंडर तैनात रहें। यह निर्देश पहाड़ी क्षेत्रों में अग्निशमन और आपदा प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है, विशेषकर उन इमारतों के लिए जो तीव्र आग के जोखिम वाली सामग्रियों से बनी हैं।

