द लोकतंत्र/ मुंबई : Nashik TCS Case से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन मामले में जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले हैं। नासिक में सामने आए इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई सोमवार (27 अप्रैल 2026) को अदालत में बंद कमरे में हुई, जहां स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर Ajay Misar ने जांच में हुई प्रगति की जानकारी दी। अभियोजन पक्ष ने इस मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही Nida Khan की अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया है। बताया जा रहा है कि निदा खान फिलहाल फरार है और जांच एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं।
इस मामले ने महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है। आरोप है कि कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला कर्मचारियों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया, उन्हें इस्लामिक रीति-रिवाज अपनाने के लिए मजबूर किया गया और यौन उत्पीड़न का भी शिकार बनाया गया।
निदा खान और अन्य आरोपियों पर गंभीर आरोप
मुख्य आरोपी Nida Khan और उसके कथित सहयोगियों पर हिंदू महिला कर्मचारियों को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने, बुर्का पहनने के लिए मजबूर करने, इस्लामिक प्रथाओं का पालन करवाने और मानसिक दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। देवलाली पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के मुताबिक, एक महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि निदा खान ने उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई और लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया।
शिकायतकर्ता ने अपने सहकर्मी Danish Sheikh पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। वहीं एक अन्य आरोपी Tausif Attar पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई धाराओं में केस दर्ज किया है।
मलेशिया में नौकरी का झांसा, नाम बदलने और हिजाब की ट्रेनिंग का आरोप
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार निदा खान ने उसका नाम बदलकर ‘हानिया’ रख दिया था और उसे मलेशिया में नौकरी दिलाने का लालच दिया। साथ ही धर्म परिवर्तन के लिए लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि निदा खान ने कहा था कि अगर उसने धर्म परिवर्तन नहीं किया तो उसके परिवार पर विपत्ति आ सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच अधिकारी ने बताया कि निदा खान कथित तौर पर शिकायतकर्ता को नमाज पढ़ने, हिजाब पहनने और इस्लामिक तौर-तरीके अपनाने की ट्रेनिंग देती थी। उसने शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन में इस्लामिक एप्लिकेशन इंस्टॉल किए और धार्मिक सामग्री शेयर की। शिकायतकर्ता ने खुद को अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़ा बताया है, जिसके बाद पुलिस ने SC/ST Act के तहत भी मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।

