द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : देश की राजनीति में विपक्षी दलों के भीतर कथित टूट और दल-बदल की चर्चाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) की सांसद Priyanka Chaturvedi ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में बगावत की खबरों के बाद समाजवादी पार्टी को लेकर भी लगाए जा रहे दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं और विपक्षी दलों को कमजोर दिखाने की कोशिश की जा रही है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इस समय कुछ लोग “हवा में पतंगबाजी” कर रहे हैं और लगातार ऐसे दावे किए जा रहे हैं जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही इस विषय पर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं और फिलहाल ऐसे दावों को गंभीरता से लेने का कोई कारण नहीं है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं और वहां किसी भी प्रकार की राजनीतिक टूट की संभावना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार संसद में संख्या बल और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए ऐसे दावे व्यावहारिक नहीं लगते।
लोकतंत्र और संविधान को कमजोर किया जा रहा – Priyanka Chaturvedi
प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्षी दलों में टूट की चर्चाओं को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे राजनीतिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को बचाव करने की जरूरत नहीं है, बल्कि जवाब उन लोगों को देना चाहिए जिन पर लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक राजनीतिक दलों को तोड़ने और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने जैसी चर्चाएं लोकतंत्र के लिए स्वस्थ संकेत नहीं हैं। प्रियंका ने कहा कि जनता ने जिन नेताओं को चुनकर संसद और विधानसभाओं में भेजा है, उन्हें अपने जनादेश का सम्मान करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है और उसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
जनता ही फैसला करेगी, राजनीति में जवाबदेही जरूरी – Priyanka Chaturvedi
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि जिन नेताओं को किसी राजनीतिक दल ने पहचान और मंच दिया, यदि वे बाद में उसी दल के खिलाफ खड़े होते हैं तो जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई नेता अपने फैसले को सही ठहराने के लिए चार पन्ने लिखे या चार सौ पन्ने, अंतिम फैसला जनता ही करेगी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास और जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए विचारधाराओं से समझौता कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और वही तय करती है कि किसे समर्थन देना है और किसे नहीं। जो नेता जनता के जनादेश के खिलाफ जाएंगे, उन्हें भविष्य में राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। विपक्षी दलों में कथित टूट और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रियंका चतुर्वेदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। आने वाले दिनों में इन घटनाक्रमों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।



