द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच संबंध एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में चल रही वार्ता पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप के बयान से नाराज ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता स्थल छोड़ दिया, जिससे दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है।
मध्य पूर्व में पहले से ही जारी अस्थिरता के बीच यह घटनाक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से लेबनान, गाजा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच यह वार्ता दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकती थी, लेकिन हालिया घटनाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
ज्यूरिख वार्ता में क्या हुई चर्चा?
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का पहला दौर लगभग 80 मिनट तक चला। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक परमाणु कार्यक्रम (न्यूक्लियर प्रोग्राम) को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि चर्चा का मुख्य केंद्र तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को लागू करने और लेबनान में बन रहे हालात पर था। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हो रही इस वार्ता को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा था। ईरान के सरकारी मीडिया के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बातचीत को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली नहीं हो पाती है तो भविष्य में किसी व्यापक समझौते की संभावना कमजोर पड़ सकती है।
Donald Trump की धमकी पर ईरान का पलटवार
वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि तेहरान को लेबनान में सक्रिय अपने सहयोगी समूहों और प्रॉक्सी संगठनों की गतिविधियों को रोकना होगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने ऐसा नहीं किया तो अमेरिका पहले से भी अधिक कठोर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान की प्रतिक्रिया भी सामने आई। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने अमेरिकी चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि ईरान की सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अमेरिका को अपने बयानों में संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा कि दबाव और धमकियों की भाषा से क्षेत्र में शांति स्थापित नहीं हो सकती।
इसी दौरान मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया जब इजरायल ने दक्षिणी गाजा में हवाई हमला किया, जिसमें दो लोगों की मौत की खबर सामने आई। ऐसे में अमेरिका-ईरान वार्ता, लेबनान की स्थिति और गाजा में जारी संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मुद्दे बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ज्यूरिख वार्ता की दिशा और अमेरिका-ईरान संबंधों में होने वाले घटनाक्रम पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देश कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं या टकराव और बढ़ता है।




