द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : देश के ग्रामीण परिवारों के लिए 1 जुलाई 2026 से एक नई शुरुआत हुई है। केंद्र सरकार ने अपनी नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण एक्ट 2025 (VB-G RAM G)’ को पूरे देश में लागू कर दिया है। सरकार का दावा है कि यह योजना पहले से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की तुलना में अधिक प्रभावी और लाभकारी होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण मजदूरों को न केवल पहले से अधिक दैनिक मजदूरी मिलेगी, बल्कि वर्षभर में रोजगार की गारंटी वाले कार्यदिवसों की संख्या भी बढ़ा दी गई है।
नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, परिवारों की आय में सुधार करना और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई मजदूरी और अतिरिक्त रोजगार दिवस ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूती देंगे तथा पलायन जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद करेंगे।
VB-G RAM G के तहत दैनिक मजदूरी में बढ़ोतरी, अब 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी
केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार, नई योजना के तहत देशभर में ग्रामीण मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है। पहले मनरेगा के तहत औसतन 298.80 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी, जबकि अब VB-G RAM G के तहत यह बढ़कर 327.40 रुपये प्रतिदिन हो गई है। यानी प्रत्येक कार्य दिवस पर मजदूरों को औसतन 28.60 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इसके अलावा इस योजना का सबसे बड़ा बदलाव रोजगार की अवधि में किया गया है। पहले पात्र ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 दिनों तक रोजगार की कानूनी गारंटी प्राप्त थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे प्रत्येक पात्र परिवार को 25 अतिरिक्त कार्य दिवसों का लाभ मिलेगा।
सरकार ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए पूरे देश के लिए 300 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी तय कर दी है। इसका अर्थ है कि अब किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पात्र मजदूरों को 300 रुपये से कम भुगतान नहीं किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य मजदूरी में समानता लाना और ग्रामीण श्रमिकों की आय को सुरक्षित करना है।
उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों को बड़ा लाभ, हरियाणा और सिक्किम में VB-G RAM G स्कीम में सबसे अधिक मजदूरी
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देश के 21 राज्यों में मजदूरी दरों को नई न्यूनतम सीमा तक बढ़ाया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे इन राज्यों के लाखों ग्रामीण परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। पूर्वोत्तर भारत में भी इस योजना का बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा। अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में मजदूरी दरों में लगभग 24.5 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे इन क्षेत्रों के दूरदराज गांवों में रहने वाले श्रमिकों की आय बढ़ेगी।
जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक थी, वहां भी बढ़ोतरी जारी रखी गई है। नई दरों के अनुसार हरियाणा में मजदूरों को 409 रुपये, गोवा में 406 रुपये, केरल में 401 रुपये और सिक्किम के पर्वतीय क्षेत्रों में सबसे अधिक 450 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलेगी। नई योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि भी जारी कर दी है। सरकार का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से रोजगार कार्यों में तेजी आएगी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास को भी नई गति मिलेगी।
यदि यह योजना तय उद्देश्यों के अनुरूप लागू होती है, तो ग्रामीण रोजगार, आय वृद्धि और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में यह केंद्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक साबित हो सकती है।




