द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर अब छोटे दलों ने भी अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने मंगलवार को अपने सभी छह प्रत्याशियों को सिंबल सौंपते हुए चुनावी रण में उतार दिया। राजधानी पटना में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष जीतन राम मांझी खुद मौजूद रहे और उम्मीदवारों को जीत का मंत्र दिया।
तीन सीटों पर परिवार के उम्मीदवार
इस बार जीतन राम मांझी ने ‘फैमिली फर्स्ट’ का फार्मूला अपनाते हुए अपने रिश्तेदारों को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा है। इमामगंज सीट से उनकी बहू दीपा मांझी को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं, सिकंदरा सीट से उनके दामाद प्रफुल्ल कुमार मांझी को टिकट मिला है। इसके अलावा बाराचट्टी से उनकी समधन ज्योति देवी को पार्टी ने उम्मीदवार घोषित किया है। इन तीनों के अलावा अतरी से रोमित कुमार, कुटुंबा से ललन राम को प्रत्याशी बनाया गया है।
| क्रमांक | विधानसभा सीट | उम्मीदवार का नाम | संबंध (यदि कोई) |
|---|---|---|---|
| 1 | इमामगंज | दीपा मांझी | बहू |
| 2 | बाराचट्टी | ज्योति देवी | समधन |
| 3 | सिकंदरा | प्रफुल्ल मांझी | दामाद |
| 4 | अतरी | रोमित कुमार | — |
| 5 | कुटुंबा | ललन राम | — |
| 6 | टिकारी | अनिल कुमार | — |
गठबंधन में दबाव बनाने की रणनीति
मांझी के इस कदम को राजनीतिक विश्लेषक महागठबंधन के भीतर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। कुछ दिनों पहले तक सीट बंटवारे को लेकर मांझी नाराज दिख रहे थे, लेकिन अब उन्होंने समय गंवाए बिना अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है। उनका कहना है कि HAM गठबंधन धर्म निभाते हुए जनता के बीच मजबूती से चुनाव लड़ेगी।
महिला सशक्तिकरण पर फोकस
HAM ने इस बार महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया है। पार्टी ने अपनी छह सीटों में से दो पर महिला उम्मीदवारों ( बहू और समधन) को प्रत्याशी बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह महिला नेतृत्व ( परिवार में) को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। दीपा मांझी और ज्योति देवी को टिकट देकर पार्टी ने सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास किया है।
दलित-पिछड़े वोट बैंक पर नज़र
हालांकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सीमित सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन मांझी की रणनीति दलित, महादलित और पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक को साधने की है। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही HAM सिर्फ छह सीटों पर चुनाव लड़े, लेकिन कई जगहों पर यह गठबंधन के समीकरणों को प्रभावित करने की स्थिति में रह सकती है।

