द लोकतंत्र/नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और NSUI का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को दिल्ली के Jantar Mantar पर NSUI कार्यकर्ताओं ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए कफन ओढ़कर सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी खुद को सांकेतिक रूप से ‘जिंदा लाश’ बताते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। NSUI कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया।
Jantar Mantar पर कफन ओढ़कर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं NSUI कार्यकर्ता?
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि Jantar Mantar पर यह प्रदर्शन कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के विरोध में किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि करीब 13 करोड़ लोगों के मताधिकार को प्रभावित किया गया है।
कार्यकर्ताओं के हाथों में ‘लोकतंत्र का हत्यारा’ और ‘वोट चोर’ जैसे नारे लिखे पोस्टर और बैनर भी नजर आए। NSUI का कहना है कि ‘जिंदा लाश’ बनकर प्रदर्शन करना उन लोगों का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व है, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने क्या कहा?
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने CEC ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें लोकतंत्र और मताधिकार के खिलाफ काम करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि Jantar Mantar पर प्रदर्शनकारी यह संदेश देना चाहते हैं कि जिन लोगों का वोट का अधिकार कथित तौर पर छीना गया है, उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। जाखड़ ने बीजेपी, RSS, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के बीच मिलीभगत है। हालांकि, ये सभी आरोप प्रदर्शनकारियों के राजनीतिक दावे हैं और इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण इस बयान में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
‘ये सांकेतिक लाशें 13 करोड़ लोगों की हैं’
विनोद जाखड़ ने कहा कि Jantar Mantar पर लेटे कार्यकर्ता उन लोगों का प्रतीक हैं, जिनके वोट कथित तौर पर काटे गए हैं। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के जरिए यह सवाल उठाया जा रहा है कि अगर लोग जीवित हैं और उनकी लोकतांत्रिक आवाज भी मौजूद है, तो फिर मतदाता सूची में उनका नाम क्यों नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य चुनाव आयोग से जवाब मांगना और मतदाता अधिकारों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना है।
‘ज्ञानेश कुमार देश और संविधान से बड़े नहीं’
NSUI अध्यक्ष ने कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार देश और संविधान से ऊपर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और RSS के नेता चुनाव आयुक्त का बचाव कर रहे हैं, जिससे चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के बीच कथित सांठ-गांठ को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता आने वाले चुनाव में इसका जवाब देगी और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर न सिर्फ़ Jantar Mantar पर ब्लकि देशभर में आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
Jantar Mantar पर बढ़ा राजनीतिक विरोध
CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का विरोध पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रहा है। Jantar Mantar पर NSUI का यह प्रदर्शन भी इसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा है। कफन ओढ़कर सड़क पर लेटे कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन ने इस मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग या संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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