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Politics

इटावा में बन रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर पर सियासत, अखिलेश यादव के पोस्ट पर मंत्री संजय निषाद का पलटवार

Politics erupts over the Kedareswar Mahadev temple being built in Etawah; Minister Sanjay Nishad retaliates against Akhilesh Yadav's post.

द लोकतंत्र/ लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धर्म और आस्था के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा इटावा के सैफई में बन रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा करते ही यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। योगी सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने इस मंदिर को ‘राजनीतिक मंदिर’ करार देते हुए अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है।

अखिलेश यादव ने अपने एक्स हैंडल पर इटावा में निर्माणाधीन केदारेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो साझा करते हुए लिखा, जब कोई ‘अदृश्य’ करवाता है, तभी ऐसा बड़ा काम आकार पाता है, दृश्यमान हो जाता है। इस पोस्ट को कई लोग सपा प्रमुख की आस्था और पहल से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं भाजपा और सहयोगी दलों ने इसे राजनीतिक संदेश देने की कोशिश बताया है।

केदारेश्वर महादेव मंदिर को लेकर संजय निषाद का आरोप

मंत्री संजय निषाद ने अखिलेश यादव के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इटावा में बन रहा केदारेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के केदारनाथ धाम की तरह दिखता जरूर है, लेकिन इसकी मंशा धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक है। उन्होंने कहा कि मंदिर समाज के सामूहिक सहयोग से बनते हैं, जैसे राम मंदिर बना। लेकिन यह मंदिर राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है। संजय निषाद ने यह भी कहा कि आस्था को राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं है और इससे धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

ओवैसी के बयान पर भी संजय निषाद की टिप्पणी

इसी दौरान मंत्री संजय निषाद ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें ओवैसी ने कहा था कि हिजाब पहनने वाली महिला एक दिन देश की प्रधानमंत्री बनेगी। इस पर संजय निषाद ने तंज कसते हुए कहा कि पहले महिलाओं की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए, केवल बयानबाजी से बदलाव नहीं आता।

बीजेपी प्रवक्ता ने भी साधा अखिलेश पर निशाना

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी इस मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाना सपा प्रमुख की “नकल की राजनीति” को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव धार्मिक प्रतीकों के जरिए अपनी राजनीतिक छवि को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भाजपा ने हमेशा आस्था और विकास को अलग-अलग रखते हुए काम किया है।

इटावा में बन रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर को लेकर अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह वास्तव में आस्था का केंद्र है या फिर राजनीति का नया मंच। अखिलेश यादव के समर्थक इसे धार्मिक और सांस्कृतिक पहल बता रहे हैं, जबकि भाजपा और सहयोगी दल इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।

Team The Loktantra

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