द लोकतंत्र/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ Raja Bhaiya को अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने मामले की दोबारा जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही Raja Bhaiya समेत पांच लोगों के खिलाफ इस मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही की मांग खारिज कर दी गई है। मामले की सुनवाई विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (CBI) प्रतिभा सिंह की अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड, सीबीआई की जांच रिपोर्ट, विशेषज्ञ राय और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया। रिपोर्टों के मुताबिक, दोबारा जांच में राजा भैया के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई थी।
Raja Bhaiya को 13 साल बाद राहत
यह मामला वर्ष 2013 में प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुए तिहरे हत्याकांड से जुड़ा है। 2 मार्च 2013 की शाम जमीन विवाद के बाद ग्राम प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्कालीन सीओ कुंडा जियाउल हक पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
मौके पर स्थिति तनावपूर्ण थी और पुलिस टीम को भीड़ का सामना करना पड़ा। इसी दौरान प्रधान के भाई सुरेश यादव की भी गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद भीड़ के हमले में सीओ जियाउल हक की हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी थी।Raja Bhaiya समेत 5 लोगों पर लगे थे गम्भीर आरोप।
Raja Bhaiya पर सीओ की पत्नी ने लगाया आरोप
सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने मामले में तत्कालीन कुंडा विधायक Raja Bhaiya समेत अन्य लोगों पर आरोप लगाए थे। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने अपनी शुरुआती जांच के बाद 31 जुलाई 2013 को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
इस रिपोर्ट का परवीन आजाद ने विरोध किया और अदालत में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इसके बाद 8 जुलाई 2014 के अदालत के आदेश पर मामले में आगे की विवेचना की गई। बाद में सीबीआई ने 22 दिसंबर 2023 को दोबारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
मामले में आगे की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कार्यवाही हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने राजा भैया की कथित भूमिका समेत मामले से जुड़े पहलुओं की दोबारा जांच की। दोबारा जांच के बाद भी सीबीआई की रिपोर्ट में अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई।
कोर्ट ने क्या कहा?
19 सितंबर 2026 के आदेश में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह की अदालत ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और जांच सामग्री का परीक्षण करने के बाद मामले में आगे कार्रवाई की मांग को खारिज कर दिया।
इस फैसले के बाद Raja Bhaiya समेत पांच नामजद लोगों के खिलाफ इस मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही नहीं होगी। हालिया रिपोर्टों में इन पांच लोगों में राजा भैया के अलावा हरिओम श्रीवास्तव, गुड्डू सिंह, रोहित सिंह और गुलशन यादव के नाम बताए गए हैं।
2024 में अन्य आरोपियों को मिली थी सजा
जियाउल हक हत्याकांड से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ चली सुनवाई में अक्टूबर 2024 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, Raja Bhaiya और अन्य पांच लोगों के खिलाफ दर्ज अलग शिकायत/एफआईआर से संबंधित जांच में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अब अदालत ने स्वीकार कर लिया है।
अब क्या बदला?
अदालत द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद Raja Bhaiya समेत पांच लोगों के खिलाफ इस मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही का रास्ता बंद हो गया है। यह आदेश वर्ष 2013 से चले आ रहे इस चर्चित मामले के एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव के रूप में सामने आया है।
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