द लोकतंत्र/Tamil Nadu: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय इन दिनों अपने राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विपक्ष के मार्च में राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया, लेकिन CM Vijay ने इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेन्नई दौरे के दौरान वह उनके साथ मेट्रो में सफर करते और मंदिर जाते नजर आए। एक तरफ कांग्रेस के साथ राजनीतिक सहयोग और दूसरी तरफ केंद्र सरकार के साथ मंच साझा करना विजय की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
राहुल गांधी की हिरासत पर CM Vijay ने क्यों साधी चुप्पी?
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने मार्च निकाला था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा, लेकिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ओर से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया। गौरतलब है कि तमिलनाडु में कांग्रेस, CM Vijay की राजनीतिक सहयोगी है। ऐसे में राहुल गांधी की हिरासत पर उनकी चुप्पी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी। हालांकि, इस चुप्पी को कांग्रेस से दूरी या केंद्र के प्रति नरमी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
राहुल गांधी के चेन्नई पहुंचने के अगले दिन पीएम मोदी का दौरा
इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प मोड़ तब आया, जब राहुल गांधी के चेन्नई पहुंचने के करीब 24 घंटे के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तमिलनाडु के दौरे पर पहुंचे। मुख्यमंत्री CM Vijay ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने मेट्रो रेल के दूसरे चरण से जुड़े प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया और एक साथ मेट्रो में सफर भी किया। इससे पहले राहुल गांधी के चेन्नई दौरे के दौरान विजय ने उन्हें अपने आवास पर आमंत्रित किया था।
दोनों नेताओं ने साथ में लंच भी किया। इस तरह कम समय के भीतर विजय की राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मोदी, दोनों के साथ मौजूदगी ने राज्य की राजनीति में उनकी प्राथमिकताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी।
पीएम मोदी के साथ मंदिर पहुंचे CM Vijay
मेट्रो परियोजना के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री मोदी आईआईटी मद्रास भी पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री विजय उनके साथ मौजूद रहे। इसके बाद दोनों नेता जलकंडेश्वरार मंदिर गए। प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री का शामिल होना स्वाभाविक माना जा सकता है, लेकिन उनके साथ मंदिर जाने की तस्वीरों ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। विजय विपक्षी दलों के साथ राजनीतिक समीकरण साझा करते हैं।
ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी मौजूदगी को केवल औपचारिकता के तौर पर देखा जाए या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक संदेश है, यह सवाल उठ रहा है। हालांकि, इन मुलाकातों के आधार पर किसी नए राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक बदलाव का निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा।
विकास और गठबंधन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश?
CM Vijay के हालिया रुख को समझने के लिए तमिलनाडु की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी नजर डालना जरूरी है। एक ओर कांग्रेस के साथ सहयोग के राजनीतिक समीकरण हैं, तो दूसरी ओर राज्य की परियोजनाओं और विकास योजनाओं के लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने चेन्नई में पूनामाल्ली बाइपास और वेडापालानी के बीच 11 मेट्रो स्टेशनों से गुजरने वाली लगभग 4,900 करोड़ रुपये की परियोजना का उद्घाटन किया। इसमें 3.7 किलोमीटर का डबल-डेकर कॉरिडोर भी शामिल है। परियोजना के उद्घाटन के बाद शाम चार बजे से मेट्रो सेवाएं शुरू होने की जानकारी दी गई।
यह परियोजना तमिलनाडु के लिए घोषित लगभग 13,000 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का हिस्सा बताई गई। ऐसे में विजय के सामने राजनीतिक सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखने और राज्य के विकास के लिए केंद्र के साथ काम करने, दोनों की चुनौती है। उनकी हालिया गतिविधियों से यह संकेत जरूर मिलता है कि वह सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक टकराव से बचते हुए अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना चाहते हैं।
क्या कांग्रेस और केंद्र के बीच संतुलन है CM Vijay की रणनीति?
राहुल गांधी को अपने आवास पर आमंत्रित करना और अगले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना CM Vijay की राजनीति के दो अलग-अलग पहलू सामने लाता है। एक तरफ सहयोगी दल के नेता के साथ मुलाकात है, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार के साथ प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यक्रमों में भागीदारी। फिलहाल विजय ने राहुल गांधी की हिरासत पर चुप्पी साध रखी है। ऐसे में उनकी रणनीति को लेकर राजनीतिक अटकलें लगना स्वाभाविक है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उनकी चुप्पी किसी खास राजनीतिक संदेश का हिस्सा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ उनके संबंध, केंद्र सरकार के प्रति उनका सार्वजनिक रुख और तमिलनाडु की राजनीति में उनके अगले कदम यह स्पष्ट कर सकते हैं कि विजय वास्तव में टकराव से दूरी बनाए रखना चाहते हैं या व्यापक राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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