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Mahashivratri vs Masik Shivratri: क्या आप भी दोनों को एक ही समझते हैं? जानें इनके बीच का बड़ा अंतर और महत्व

The loktnatra

द लोकतंत्र : हिंदू धर्म में भगवान शिव को ‘देवों के देव महादेव’ कहा गया है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई व्रत और त्योहार मनाते हैं, जिनमें शिवरात्रि का सबसे अधिक महत्व है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक उलझन रहती है कि ‘महाशिवरात्रि’ और ‘मासिक शिवरात्रि’ क्या एक ही हैं?

आज 5 फरवरी है और आने वाली 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का बड़ा पर्व मनाया जाने वाला है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर इन दोनों में क्या अंतर है और इनका आध्यात्मिक महत्व क्या है।

महाशिवरात्रि: साल का सबसे बड़ा उत्सव

महाशिवरात्रि का पर्व साल में केवल एक बार आता है। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।

  • लिंग रूप में प्राकट्य: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव पहली बार ‘ज्योतिर्लिंग’ के रूप में प्रकट हुए थे। इसी अग्नि स्तंभ के रूप में उन्होंने ब्रह्मा और विष्णु जी की परीक्षा ली थी।
  • शिव-पार्वती विवाह: कई जगहों पर यह भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।
  • तारीख: साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी।

मासिक शिवरात्रि: हर महीने महादेव की भक्ति

वहीं दूसरी ओर, मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।

  • साल में 12 बार: चूँकि यह हर महीने पड़ती है, इसलिए इसे ‘मासिक शिवरात्रि’ या ‘शिव चतुर्दशी’ कहते हैं। साल भर में कुल 12 मासिक शिवरात्रियाँ होती हैं।
  • महत्व: महाशिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक है, क्योंकि यह महादेव के प्राकट्य का मुख्य दिन है, जबकि मासिक शिवरात्रि निरंतर भक्ति और संकल्प का प्रतीक है।

पूजा का समय: क्यों होती है रात में पूजा?

दोनों ही शिवरात्रियों में एक बात समान है—महादेव की विशेष पूजा रात में ही की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, भोलेनाथ आधी रात को लिंग रूप में अवतरित हुए थे, इसलिए रात के चारों प्रहरों में शिव पूजन का विधान है। भक्त पूरी रात जागरण करते हैं, ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं और अगले दिन व्रत का पारणा करते हैं।

व्रत का फल

माना जाता है कि जो भक्त महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि का व्रत पूरी श्रद्धा से रखते हैं, उनके जीवन से सारे दुख और दरिद्रता दूर हो जाती है। यह व्रत कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर दिलाने और विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है।

संक्षेप में कहें तो मासिक शिवरात्रि हर महीने का अवसर है, जबकि महाशिवरात्रि साल का महा-उत्सव। 15 फरवरी को आने वाली महाशिवरात्रि के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दें, क्योंकि यह दिन शिव कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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