द लोकतंत्र : भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और एलन मस्क के स्वामित्व वाली सोशल मीडिया कंपनी ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के मध्य विवाद गहराता जा रहा है। एआई टूल ‘ग्रोक’ (Grok) के माध्यम से निर्मित यौन-स्पष्ट (Sexually-Explicit) और अश्लील कंटेंट के मुद्दे पर एक्स द्वारा सौंपे गए जवाब को मंत्रालय ने अपर्याप्त और असंतोषजनक करार दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय अब एक्स के विरुद्ध आईटी नियमों के तहत आगे की दंडात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है। यह विवाद न केवल डिजिटल सुरक्षा के प्रश्न खड़े करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भारत में संचालित विदेशी टेक कंपनियों को स्थानीय कानूनों और सुरक्षा मानकों के प्रति पूर्णतः जवाबदेह होना होगा।
ग्रोक एआई और डीपफेक का संकट: वैश्विक जांच के घेरे में
विवाद का मुख्य केंद्र ‘ग्रोक एआई’ की वह क्षमता है जिसके माध्यम से महिलाओं और बच्चों की तस्वीरों के साथ बिना सहमति के छेड़छाड़ की जा रही है।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभाव: भारत के साथ-साथ यूके और यूरोपीय संघ में भी इस तथ्य की जांच हो रही है कि क्या ग्रोक में पर्याप्त सुरक्षा फिल्टर (Safety Filters) मौजूद हैं। भारत सरकार का प्राथमिक तर्क है कि एक्स अपने प्लेटफॉर्म पर आईटी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2021 का अक्षरशः पालन करने में विफल रहा है।
- बिना सहमति के रूपांतरण: रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रोक का उपयोग करके वास्तविक तस्वीरों को अश्लील छवियों में परिवर्तित किया जा रहा है, जो निजता के अधिकार और बाल सुरक्षा कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
मंत्रालय का सख्त अल्टीमेटम: 72 घंटे की समय सीमा
मंत्रालय ने 2 जनवरी को एक्स को एक विस्तृत निर्देश जारी किया था, जिसमें 72 घंटों के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) मांगी गई थी।
- आपत्तिजनक कंटेंट का निष्कासन: सरकार ने निर्देश दिया था कि सभी अश्लील और गैरकानूनी कंटेंट को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।
- एआई मॉनिटरिंग: ग्रोक एआई द्वारा भविष्य में इस प्रकार के कंटेंट के सृजन को रोकने के लिए तकनीकी बदलावों की जानकारी मांगी गई थी।
- असंतुष्ट मंत्रालय: एक्स ने दावा किया है कि वह अश्लील कंटेंट पोस्ट करने वालों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपना रहा है और खातों को स्थायी रूप से प्रतिबंधित (Permanently Ban) कर रहा है, किंतु मंत्रालय का मानना है कि कंपनी की निवारक प्रणाली (Prevention Mechanism) अभी भी कमजोर है।
भविष्य की वैधानिक दिशा और प्रभाव
- यदि एक्स सरकार को संतुष्ट करने में विफल रहता है, तो उसे आईटी नियमों के तहत ‘सुरक्षित बंदरगाह’ (Safe Harbour) का संरक्षण खोना पड़ सकता है। इसका अर्थ है कि प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए किसी भी अवैध कंटेंट के लिए कंपनी को कानूनी रूप से उत्तरदायी ठहराया जा सकेगा। डिजिटल कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला एआई सुरक्षा मानकों (AI Safety Standards) के लिए एक मिसाल बनेगा। आने वाले समय में, सरकार एआई एल्गोरिदम की ऑडिटिंग और अनिवार्य डेटा लोकलाइजेशन जैसे सख्त कदम उठा सकती है ताकि भारतीय नागरिकों के डिजिटल अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
निष्कर्षतः, एक्स और भारत सरकार के बीच का यह गतिरोध यह सिद्ध करता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सुरक्षा समझौतों की अनदेखी नहीं की जा सकती। ग्रोक एआई जैसी नवीन तकनीकों का विकास यदि मानवीय गरिमा और निजता की कीमत पर होता है, तो सरकारों का सख्त रुख अपरिहार्य है। मंत्रालय द्वारा मांगी गई अतिरिक्त जानकारी और आगामी कार्रवाई यह तय करेगी कि भारत में ‘एक्स’ का परिचालन भविष्य में कितना सहज होगा।

