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प्रेग्नेंसी में पेट पर क्यों बनती है काली लाइन? जानें लिनिया नाइग्रा के पीछे का वैज्ञानिक कारण

The loktnatra

द लोकतंत्र : गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। कुछ बदलाव अंदरूनी होते हैं, तो कुछ बाहर से साफ नजर आते हैं। इन्हीं में से एक है पेट के बीचों-बीच उभरने वाली एक गहरी काली या भूरे रंग की वर्टिकल लाइन, जिसे डॉक्टरी भाषा में ‘लिनिया नाइग्रा’ (Linea Nigra) कहा जाता है।

अक्सर महिलाएं इस लाइन को देखकर चिंता में पड़ जाती हैं या इसे लेकर पुरानी कहानियों पर भरोसा करने लगती हैं। आइए जानते हैं इस लाइन के पीछे का असली सच।

लिनिया एल्बा से लिनिया नाइग्रा तक का सफर

हकीकत यह है कि यह लाइन हर किसी के पेट पर जन्म से होती है, जिसे ‘लिनिया एल्बा’ (सफेद लाइन) कहते हैं। सामान्य दिनों में यह त्वचा के रंग की या सफेद होती है, इसलिए दिखाई नहीं देती। लेकिन प्रेग्नेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर (लगभग पांचवें महीने) के आसपास, हार्मोनल बदलावों के कारण यह गहराने लगती है और ‘लिनिया नाइग्रा’ यानी काली लाइन बन जाती है।

क्यों दिखाई देती है यह लाइन?

इसका सबसे बड़ा कारण है आपके शरीर के हार्मोन्स। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान प्लेसेंटा एक खास हार्मोन (Melanocyte-stimulating hormone) बनाता है। यह हार्मोन शरीर में ‘मेलेनिन’ की मात्रा बढ़ा देता है। मेलेनिन वही तत्व है जो हमारी त्वचा और बालों को रंग देता है। मेलेनिन बढ़ने की वजह से ही पेट की वह हल्की लकीर गहरी होकर साफ दिखने लगती है।

क्या सभी महिलाओं में यह लाइन होती है?

आंकड़ों की मानें तो लगभग 80% गर्भवती महिलाओं के पेट पर यह लाइन उभरती है।

  • स्किन टोन का असर: जिन महिलाओं का रंग गहरा होता है, उनमें यह लाइन ज्यादा साफ और डार्क दिखती है।
  • गोरा रंग: हल्के रंग की त्वचा वाली महिलाओं में यह लाइन कम दिखाई दे सकती है या बहुत हल्की भूरी हो सकती है।

क्या इसका कोई खास काम है?

हैरानी की बात यह है कि वैज्ञानिक अभी तक निश्चित रूप से नहीं जानते कि यह लाइन किस काम आती है। कुछ पुरानी मान्यताओं के अनुसार, यह गहरी लाइन नवजात शिशु को मां के स्तनों तक (स्तनपान के लिए) दिशा दिखाने में मदद करती है, क्योंकि जन्म के समय बच्चों की नजर कमजोर होती है। हालांकि, इस बात का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

डिलीवरी के बाद क्या होता है?

बच्चे के जन्म के बाद जैसे ही शरीर में हार्मोन्स का लेवल वापस नॉर्मल होने लगता है, यह लाइन धीरे-धीरे हल्की पड़ने लगती है।

  • समय सीमा: इसे पूरी तरह साफ होने में कुछ हफ्ते या महीने लग सकते हैं।
  • ध्यान दें: कुछ महिलाओं में यह बहुत हल्की रह जाती है और पूरी तरह गायब नहीं होती, जो कि बिल्कुल सामान्य है।

लिनिया नाइग्रा प्रेग्नेंसी का एक बेहद सामान्य और सुरक्षित हिस्सा है। इसके लिए किसी क्रीम या इलाज की जरूरत नहीं होती। यह आपके शरीर के भीतर पल रही नई जान और बदलती प्रकृति का एक सुंदर संकेत मात्र है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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