द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इसके पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार के आगामी सत्र में परिसीमन (Delimitation) विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित प्रस्तावों को दोबारा पेश किए जाने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष Mallikarjun Kharge ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संशोधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
खरगे का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय पर संसद में विधेयक पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि वे प्रस्ताव का अध्ययन कर सकें और व्यापक सहमति के आधार पर आगे बढ़ा जा सके। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार बिना संवाद के विधेयक लाती है तो विपक्ष मानसून सत्र में इसका पुरजोर विरोध करेगा।
Mallikarjun Kharge ने पत्र में उठाया संवाद का मुद्दा, कहा- पहले भी नहीं मानी गई थी मांग
प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उन्होंने पहले भी संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन और अन्य संवैधानिक प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था, लेकिन सरकार ने उस मांग पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था। अब मीडिया रिपोर्टों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि सरकार मानसून सत्र के दौरान संशोधित विधेयक को फिर से संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है।
खरगे ने सरकार से आग्रह किया कि यदि संशोधित प्रस्ताव लाया जा रहा है तो उसे संसद में पेश करने से पहले सभी दलों के साथ साझा किया जाए। उनका कहना है कि इस तरह के संवैधानिक बदलावों पर व्यापक राजनीतिक सहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करती है और इससे भविष्य में विवाद की संभावना भी कम होती है। कांग्रेस का मानना है कि परिसीमन जैसे विषय का प्रभाव केवल लोकसभा सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय ढांचे पर भी पड़ सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर सभी पक्षों की राय लेना आवश्यक है।
मानसून सत्र में सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी, Mallikarjun Kharge ने की बैठक
कांग्रेस ने मानसून सत्र के लिए अपनी संसदीय रणनीति लगभग तय कर ली है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन विधेयक के अलावा कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इनमें राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, एथनॉल नीति, विदेश नीति तथा अन्य जनहित के विषय शामिल हैं। पार्टी का दावा है कि लोकसभा में सरकार के पास किसी संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित नहीं है। ऐसे में कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ समन्वय बढ़ाकर साझा रणनीति तैयार करने में जुटी है।
इसी उद्देश्य से कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, राज्यसभा में मुख्य सचेतक जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति, विपक्षी दलों के साथ समन्वय और संसद में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अब राजनीतिक नजरें 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र पर टिकी हैं। यदि केंद्र सरकार संशोधित परिसीमन विधेयक को दोबारा संसद में पेश करती है, तो इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। ऐसे में आगामी संसद सत्र केवल विधायी कार्यवाही ही नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का भी गवाह बन सकता है।




