द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान एक ऐसा रणनीतिक कदम उठाने पर विचार कर रहा है, जो वैश्विक राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के करीब था, इसी वजह से उस पर कार्रवाई की गई। अब इसी पृष्ठभूमि में ईरान की संसद में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संकेत दिए हैं कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है और जल्द ही कोई निर्णय सामने आ सकता है। यदि ईरान NPT से बाहर निकलता है, तो उस पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी समाप्त हो जाएगी, जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम पर वैश्विक नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस संभावित फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता तेज हो गई है।
NPT से बाहर निकलने का क्या होगा असर?
NPT से बाहर निकलने का मतलब होगा कि ईरान पर लागू कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और निगरानी व्यवस्थाओं का प्रभाव कम हो जाएगा। इससे ईरान को परमाणु तकनीक के विकास में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकता है और मिडिल ईस्ट में हथियारों की होड़ तेज हो सकती है।
दुनिया के कुछ देश जैसे भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया पहले से ही NPT ढांचे से बाहर हैं। ऐसे में यदि ईरान भी इस सूची में शामिल होता है, तो वैश्विक परमाणु संतुलन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान का रुख: दबाव और अधिकारों के बीच संतुलन
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में सक्रिय नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और हमलों को देखते हुए अपनी रणनीति की समीक्षा कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ऐसी संधि में बने रहने का क्या लाभ, जिसमें देश को अपने अधिकारों का पूरा उपयोग करने से रोका जाए और उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए जाएं।
पिछले साल हुए संघर्ष के दौरान ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसे प्रमुख परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया। अब देखना होगा कि ईरान का अंतिम फैसला क्या होता है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

