द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत में जनगणना की प्रक्रिया अब एक नए और आधुनिक रूप में सामने आ रही है। जनगणना 2027 के तहत पहली बार स्व-गणना (Self Enumeration) की डिजिटल पहल शुरू की गई है, जिसमें देश के नागरिक खुद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इस ऐतिहासिक पहल में देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाई। राष्ट्रपति Droupadi Murmu, प्रधानमंत्री Narendra Modi और उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी भरकर इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित किया।
इस नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय राजधानी Delhi सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना का कार्य प्रारंभ हो चुका है। सरकार का उद्देश्य इस डिजिटल पहल के माध्यम से जनगणना को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिकों के अनुकूल बनाना है। यह कदम न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि नागरिकों को डेटा प्रबंधन में सीधे शामिल करने की दिशा में भी बड़ा बदलाव है।
स्व-गणना से बढ़ेगी भागीदारी और पारदर्शिता
स्व-गणना के लिए 15 दिनों की एक निर्धारित अवधि तय की गई है, जिसमें नागरिक सरकारी पोर्टल पर जाकर अपने परिवार, आवास और अन्य आवश्यक विवरण स्वयं दर्ज कर सकते हैं। यह प्रणाली उन लोगों के लिए विशेष रूप से सुविधाजनक है, जो डिजिटल माध्यम से कार्य करना पसंद करते हैं और अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण चाहते हैं।
राष्ट्रपति भवन से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में स्वयं अपनी जानकारी दर्ज की, जिससे इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता और महत्व को बल मिला। वहीं, प्रधानमंत्री ने भी लोगों से अपील की है कि वे इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, ताकि देश के विकास के लिए सटीक और अद्यतन डेटा उपलब्ध हो सके।
दो चरणों में पूरी होगी पूरी प्रक्रिया
जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में आवास और भवनों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे। दिल्ली में इस प्रक्रिया को अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों के अनुसार लागू किया जा रहा है, जहां कुछ क्षेत्रों में स्व-गणना तुरंत शुरू हो चुकी है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह निर्धारित समयावधि में संचालित होगी।
इसके बाद पारंपरिक तरीके से घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने का अभियान भी चलाया जाएगा, जिससे डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जा सके। इस डिजिटल बदलाव से न केवल जनगणना प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि यह देश को डेटा आधारित नीति निर्माण की दिशा में और मजबूत बनाएगा।

