द लोकतंत्र : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से एटीएफ (ATF) यानी विमान ईंधन के दाम 8.5% तक बढ़ गए हैं। इसका नतीजा यह है कि देश के लगभग सभी बड़े रूट्स पर हवाई किराया 30 से 35 फीसदी तक महंगा हो गया है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
किसी भी एयरलाइन को चलाने के कुल खर्च में से करीब 35% से 45% हिस्सा ईंधन (Fuel) का होता है। जैसे ही ईंधन महंगा होता है, कंपनियां इसका बोझ यात्रियों पर डाल देती हैं। इसी वजह से इंडिगो, एयर इंडिया और आकासा एयर जैसी एयरलाइंस ने ‘फ्यूल सरचार्ज’ लगाना शुरू कर दिया है।
दिल्ली और जयपुर से उड़ान का हाल
दिल्ली से गोवा जाने का जो टिकट पहले ₹4,500 में मिल जाता था, वह अब ₹9,000 से शुरू होकर ₹11,000 तक पहुँच गया है। दिल्ली से बेंगलुरु का किराया भी ₹12,500 के पार निकल चुका है। जयपुर के यात्रियों को भी तगड़ा झटका लगा है। जयपुर से बेंगलुरु का न्यूनतम किराया ₹11,500 है, जो मांग बढ़ने पर ₹24,000 तक जा रहा है। वहीं, जयपुर से गोवा का सफर अब ₹13,000 से कम में मुमकिन नहीं लग रहा।
छोटे शहरों के यात्री भी परेशान
सिर्फ बड़े महानगर ही नहीं, बल्कि रांची और नागपुर जैसे शहरों में भी किराए ने आसमान छू लिया है।
- रांची: दिल्ली का टिकट ₹15,000 और मुंबई का ₹16,000 तक पहुँच गया है।
- नागपुर: दिल्ली का टिकट महज कुछ दिनों में ₹6,000 से बढ़कर ₹13,000 के पार हो गया है।
- कोच्चि: यहाँ तो किराया तीन गुना बढ़कर ₹18,000 तक पहुँच गया है।
फ्यूल सरचार्ज की एक्स्ट्रा मार
एयरलाइंस अब टिकट के साथ अलग से फ्यूल सरचार्ज भी वसूल रही हैं। इंडिगो ने दूरी के हिसाब से ₹275 से ₹950 तक का अतिरिक्त चार्ज लगाया है। वहीं, इंटरनेशनल फ्लाइट्स की स्थिति और भी खराब है। खाड़ी देशों के लिए ₹5,000 और यूरोप जाने के लिए ₹10,000 तक का एक्स्ट्रा सरचार्ज देना पड़ रहा है।
कब मिलेगी राहत?
जानकारों का मानना है कि जब तक ईरान संकट कम नहीं होता और कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक किराए में गिरावट की उम्मीद कम है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस को थोड़ी राहत देने की कोशिश की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रूटों पर यात्रियों को कोई ढाल नहीं मिली है। फिलहाल सलाह यही है कि अगर सफर जरूरी है, तो जितनी जल्दी हो सके टिकट बुक कर लें।

