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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा: ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम, होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र

US-Iran Tensions Escalate: Trump Issues 48-Hour Ultimatum; Strait of Hormuz Becomes Center of Global Concern

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच टकराव को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तय समयसीमा के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को नहीं खोला गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अब ईरान के पास बहुत कम समय बचा है और 48 घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

ट्रंप ने याद दिलाया कि इससे पहले उन्होंने ईरान को समझौते और जलडमरूमध्य खोलने के लिए सीमित समय दिया था, जिसे बाद में बढ़ाया गया। हालांकि ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को एकतरफा बताते हुए खारिज कर दिया। इस बीच ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरानी अधिकारियों ने अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत के लिए अधिक समय मांगा था, लेकिन अब धैर्य की सीमा समाप्त हो रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। इस रास्ते के बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को इस मार्ग से तेल की सीधी जरूरत नहीं है, लेकिन जो देश इस पर निर्भर हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका सहयोग करेगा, लेकिन नेतृत्व अन्य देशों को लेना होगा।

सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और बदलते बयान

ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि ईरान अमेरिकी शर्तों को नहीं मानता, तो उसके ऊर्जा ढांचे, खासकर पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि उनके बयानों में समय-समय पर बदलाव भी देखने को मिला है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। कभी उन्होंने 48 घंटे की चेतावनी दी, तो कभी समयसीमा बढ़ाने की बात कही।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाज़ी से मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है। साथ ही, इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले 48 घंटे में ईरान क्या रुख अपनाता है और क्या यह तनाव किसी बड़े टकराव में बदलता है या कूटनीति के जरिए हल निकलता है।

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Team The Loktantra

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