द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : PM Modi द्वारा लगातार दो दिनों तक देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील किए जाने के बाद लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रविवार को हैदराबाद में आयोजित सभा और सोमवार को गुजरात के वडोदरा में सरदार धाम हॉस्टल के उद्घाटन समारोह के दौरान पीएम मोदी ने पेट्रोल और डीजल की बचत पर जोर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या देश में फिर से लॉकडाउन जैसे हालात बनने वाले हैं। हालांकि केंद्र सरकार और विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति चिंताजनक नहीं है और देश ऊर्जा सुरक्षा के मामले में मजबूत स्थिति में है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मिडिल ईस्ट और यूक्रेन में जारी युद्धों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोरोना काल के दौरान अपनाई गई वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग जैसी व्यवस्थाओं को जहां संभव हो, फिर से प्राथमिकता दी जाए ताकि ईंधन की बचत हो सके।
सरकार ने साफ किया है कि देश में किसी भी प्रकार की ईंधन कमी नहीं है और भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। ऐसे में फिलहाल लॉकडाउन जैसी किसी स्थिति की संभावना नहीं बताई जा रही है।
भारत के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार
सरकार के अनुसार भारत के पास करीब 60 दिनों का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक भी सुरक्षित रखा गया है। यह भंडार वैश्विक तनाव और आपूर्ति संकट के बावजूद देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर काफी तैयारी की है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाई गई है और अलग-अलग देशों से तेल आयात के विकल्प विकसित किए गए हैं। यही वजह है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील का उद्देश्य लोगों को संसाधनों के प्रति जिम्मेदार बनाना और विदेशी मुद्रा की बचत को बढ़ावा देना माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि लोग अनावश्यक यात्रा और ईंधन खपत को कम करें ताकि आर्थिक दबाव को नियंत्रित रखा जा सके।
विदेशी मुद्रा भंडार और रिफाइनिंग क्षमता से मजबूत भारत
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर से अधिक है, जो लगभग 10 से 11 महीनों के आयात खर्च को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। यह भंडार वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है।
इसके अलावा भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनर और चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक देश है। देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता लगभग 250 से 255 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 450 MMTPA करने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन मजबूत रिफाइनिंग नेटवर्क और रणनीतिक भंडारण व्यवस्था देश को अन्य देशों की तुलना में अधिक सुरक्षित स्थिति में रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात सतर्क रहने की मांग जरूर करते हैं, लेकिन फिलहाल देश में लॉकडाउन जैसी स्थिति बनने की आशंका नहीं है।

