द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील पर सियासत तेज हो गई है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी की अपील से देश में भ्रम और अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
वारिस पठान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया भाषण में लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, विदेश यात्राओं से बचने और सोना न खरीदने की अपील की। उनके मुताबिक, इन बयानों के बाद आम जनता के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या देश में फिर से लॉकडाउन जैसी स्थिति बनने वाली है।
उन्होंने कहा कि जनता अब काफी समझदार हो चुकी है और सरकार की नीतियों को ध्यान से देख रही है। AIMIM नेता ने तंज कसते हुए कहा कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का नारा अब लोगों के बीच अलग तरह से चर्चा में है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली और निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ।
‘सरकार अपनी नीतियों को लागू करने में विफल रही’
वारिस पठान ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट और यूक्रेन युद्ध के दौरान विपक्ष लगातार सरकार को चेतावनी दे रहा था कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत पर पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय रहते प्रभावी नीति बनाने में असफल रही और अब जनता से त्याग करने की अपील की जा रही है। AIMIM नेता ने कहा कि अगर ईंधन बचत और खर्च कम करने की जरूरत थी तो सरकार को पहले ही स्पष्ट रोडमैप देना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा नेताओं ने चुनावी दौर में बड़े-बड़े रोड शो किए और भारी संसाधनों का इस्तेमाल किया। ऐसे में अब आम जनता से बचत और सादगी की अपील करना विरोधाभासी नजर आता है।
वारिस पठान ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि सरकार की आगे की आर्थिक रणनीति क्या होगी और वैश्विक संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि केवल अपील करने से हालात नहीं बदलेंगे, बल्कि सरकार को स्पष्ट नीति और भरोसेमंद दिशा दिखानी होगी।
पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद और गुजरात में अपने संबोधन के दौरान लोगों से ईंधन बचाने और अनावश्यक खर्चों से बचने की अपील की थी। उन्होंने कोरोना काल में अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग जैसे तरीकों को फिर से प्राथमिकता देने की बात कही थी।
पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने और ईंधन की बचत करने का आग्रह किया था।
प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। जहां AIMIM और कई विपक्षी दल इसे सरकार की आर्थिक चिंता से जोड़ रहे हैं, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने केवल वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की अपील की है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

