द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : US-Iran के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब शांति और समझौते की उम्मीदें मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं को लेकर सामने आई नई जानकारी के अनुसार, एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MOU) के मसौदे पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि इस ड्राफ्ट में परमाणु कार्यक्रम, तेल प्रतिबंधों में राहत, आर्थिक सहयोग और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने जैसे कई अहम मुद्दों को शामिल किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच प्रारंभिक सहमति बनने के बाद अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की शर्तों पर विस्तृत बातचीत की जाएगी। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
US-Iran के बीच तेल प्रतिबंधों में राहत और हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति
रिपोर्ट्स के अनुसार, समझौते के मसौदे में ईरान द्वारा सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को तत्काल प्रभाव से खोलने की बात शामिल है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ ही अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमति जताई है।
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने यह आश्वासन भी दिया है कि अंतिम समझौते तक ईरान पर कोई नया आर्थिक प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा ईरान के तेल निर्यात पर लागू कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी राहत देने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे तेहरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का अवसर मिल सकेगा। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की रुकी हुई संपत्तियों को जारी करने पर विचार कर रहा है। इसमें प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण, क्षेत्रीय वित्तीय सहयोग और विशेष क्रेडिट सुविधाओं जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान, US-Iran के मध्य संवर्धित यूरेनियम पर होगी चर्चा
समझौते के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम शामिल है। ईरान ने कथित तौर पर इस बात पर सहमति जताई है कि वह न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही उसे हासिल करने की दिशा में कोई कदम उठाएगा। अंतिम समझौता होने तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति बनाए रखने पर भी राजी हुआ है।
इसका अर्थ है कि ईरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन की गतिविधियों का विस्तार नहीं करेगा और नई परमाणु सुविधाओं का निर्माण भी नहीं करेगा। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच इस बात पर भी सहमति बनी है कि ईरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने के तरीकों पर अगले 60 दिनों के भीतर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
हालांकि दोनों देशों की ओर से अभी तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सामने आ रही जानकारियां संकेत देती हैं कि वर्षों से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों में नरमी आ सकती है। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार होगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिरता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।




